ठंड हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों पर भारी पड़ रही है। बीते 12 दिनों में ही शहर में इनसे 20 से अधिक मरीजों की मौत हुई है। पिछले एक महीने में केवल सरकारी अस्पतालों में ही ऐसी 56 मौतें दर्ज की गई हैं। एम्स, हमीदिया और निजी अस्पतालों के पिछले एक महीने के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में हार्ट अटैक के 406 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए, जबकि 220 से ज्यादा मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक के कारण इलाज की जरूरत पड़ी। हमीदिया के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आयुष दुबे के अनुसार, सामान्य दिनों में रोज औसतन तीन ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते थे, लेकिन ठंड बढ़ने के बाद यह संख्या चार से पांच और कई दिनों में छह तक पहुंच रही है। ब्रेन स्ट्रोक में साढ़े 4 घंटे अहम
डॉ. दुबे बताते हैं कि सर्दी में खून का गाढ़ापन बढ़ने से नसों में थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है। जब यह थक्का दिमाग की नसों में फंस जाता है तो ब्रेन स्ट्रोक होता है। कई मामलों में इसके लक्षण अचानक सामने आते हैं। ब्रेन स्ट्रोक में 4.5 घंटे का समय ‘गोल्डन आवर’ माना जाता है। इस दौरान इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। 30-50 वालों में कार्डियेक अरेस्ट बढ़े… एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट प्रो. डॉ. भूषण शाह का कहना है कि हर दिन छह से 7 मरीज हार्ट अटैक केस आ रहे हैं, जबकि सामान्य तौर पर 2-3 आते हैं। इनमें 30-50 उम्र वाले भी हैं। तापमान में एक डिग्री की गिरावट से बढ़ते हैं 1.6 फीसदी हार्ट के मरीज
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में 2023 में छपी एक स्टडी के मुताबिक तापमान में सिर्फ एक डिग्री की गिरावट आती है, तो हार्ट के मरीजों में 1.6 फीसदी का इजाफा होता है। यही नहीं, इसके लक्षण 1.2 फीसदी बढ़ जाते हैं। ऐसे में ठंड में लोगों में हार्ट की बीमरी जैसे लक्षण कुछ बढ़ जाते हैं, जैसे- छाती में जकड़न या सांस लेने में असहजता। यह हार्ट अटैक के लक्षणों जैसे ही महसूस होते हैं। बस फर्क यह है कि ज्यादातर लोग खराब जीवनशैली वाले ही हैऔर रूटीन चेकअप नहीं कराते हैं।


