राज्य में कड़ाके की ठंड के बीच जिले के सदर अस्पतालाें में ठंड जनित मरीजों की संख्या बढ़ी है। राज्य के अस्पतालों में न तो इसके लिए अलग से बेड की व्यवस्था है और न ही डॉक्टरों की। मरीजों के लिए कंबल की व्यवस्था नहीं है। ठंड से जुड़े हाइपोथर्मिया और फास्टबाइट (कोल्ड स्ट्रोक) के मरीज भी इलाज कराने आ रहे हैं। बोकारो में पांच दिनों में हाइपोथर्मिया के 65 और हजारीबाग में डेढ़ सौ मरीज आए। डॉक्टरों की माने तो इस बीमारी के तीन स्टेज होते हैं। राज्य में फर्स्ट स्टेज के मरीज अधिक आते हैं। ठंड में इजाफा होने के कारण लोगों के शरीर में सूनापन हो जाता है और छालेनुमा आकृति बन जाती है। स्थान हाइपोथर्मिया ठंड जनित
के मरीज बीमारी बोकारो 65 46
जामताड़ा 00 1540
गिरिडीह 00 630
घाटशिला 00 420
चाईबासा 00 280
पलामू 00 2800
रामगढ़ 00 1330
कोडरमा 00 350
सिमडेगा 00 420
हजारीबाग 150 1050
चतरा 00 455
गुमला 00 700
लातेहार 01 315
खूंटी 00 2100 हाइपोथर्मिया व फ्रास्टबाइट नामक बीमारी बढ़ने का मुख्य कारण लोगों को ठंड में बरती जाने वाली लापरवाही है। जब मनुष्य के शरीर का तापमान वातावरण के तापमान से ज्यादा नीचे चला जाता है, तब वह इस बीमारी के चपेट में आता है। मनुष्य के शरीर का तापमान 35.05 डिग्री निर्धारित है, जब तापमान इससे काफी अधिक नीचे जाने लगता है, तब यह बीमारी होने की आशंका काफी अधिक होती है। ऐसे में ठंड बढ़ने के कारण बहुत से लोग बुजुर्ग परिजन और बच्चों को खिड़कियों के पास सुलाने, बच्चे को लापरवाही के साथ जमीन पर ही छोड़ देने या फिर जमीन पर ही सुलाने, ठंड पानी, बासी भात, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम आदि का सेवन करने की वजह से यह बीमारियां हो रही हैं।


