भास्कर एक्सपर्ट कामाख्या नारायण, शिशु रोग विशेषज्ञ शरीर का तापमान कमहोने से बढ़ रही बीमारी {हाइपोथर्मिया से बचाव के क्याउपाय हैं?- बुजुर्गों व 5 वर्ष तक के बच्चों कोगरम कपड़े पहनाएं। घरों कीखिड़कियां, दरवाजे बंद रखें।{ इस प्रकार के मरीजों कोक्या-क्या परहेज करना चाहिए?- ठंड में बच्चे, बुजुर्ग, सभी को ठंडेपानी से परहेज करना चाहिए, बासीभोजन न खाएं। कोल्ड ड्रिंक,आइसक्रीम से परहेज करें।{किस प्रकार के भोजन करें?-पानी उबाल कर सेवन करें। नवजातको चिपकाकर स्तनपान कराएं। बच्चोंव बुजुर्गों को गर्म कपड़ा पहनाएं।{इस बीमारी में तापमान कितनानिर्धारित होता है?-शरीर का तापमान जब 35.05 सेनीचे जाता है और शरीर ठंडा पड़नेलगे तो खतरे का संकेत है।{बच्चों व बुजुर्गों क्या प्रभावपड़ता है?-बच्चों व बुजुर्गों में इससे लूज मोशन,वजन घटना, शरीर में कंपकंपी होने परहाइपोथर्मिया के लक्षण की संभावनाहोती है। हाइपोथर्मिया के हजारीबाग में डेढ़ सौ व बोकारो में 65 मरीज पाए गए राज्य में कड़ाके की ठंड के बीचजिले के सदर अस्पतालों में ठंडजनित मरीजों की संख्या में बहुतवृिद्ध हुई है। राज्य के अस्पतालों मेंन तो इसके लिए अलग से बेड कीव्यवस्था है और न ही डॉक्टरों की।मरीजों के लिए कंबल की व्यवस्थाकहीं है कहीं नहीं है। ऐसी स्थिति मेंरोज ठंड से मरने वालों की संख्याबढ़ रही है।ठंड से जुड़े हाइपोथर्मिया औरफास्टबाइट (कोल्ड स्ट्रोक) केमरीज भी इलाज कराने आ रहे हैं।बोकारो में पांच दिनों मेंहाइपोथर्मिया के 65 और हजारीबागमें डेढ़ सौ मरीज आए। डॉक्टरों कीमाने तो इस बीमारी के तीन स्टेजहोते हैं। राज्य में फर्स्ट स्टेज केमरीज अधिक आते हैं।ठंड में इजाफा होने के कारणलोगों के शरीर में सूनापन हो जाताहै और छालेनुमा आकृति बन जातीहै। अगर मरीज को समय पर इलाजके लिए अस्पताल नहीं पहुंचायागया, तो यह बीमारी जानलेवा भी होसकती है। ठंड लगने पर दिए जानेवाले एंटीबायोटिक जैसेसेफ्ट्रिक्सओन, नेबुलाइजर, इन्हेलर,ऑक्सीजन पंप की जरूरत होतीहै। अस्पताल में वार्ड के तापमानको िनयंत्रित करने के िलए हीटरभी आवश्यक है। पर अधिकांश मेंयह सुविधा नदारद है। ठंड जनित बीमारियों के कारण खूंटी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी। कोडरमा 00 350सिमडेगा 00 420हजारीबाग 150 1050चतरा 00 455गुमला 00 700लातेहार 01 315खूंटी 00 2100 स्थान हाइपोथर्मिया ठंड जनित के मरीज बीमारी बोकारो 65 46जामताड़ा 00 1540गिरिडीह 00 630घाटशिला 00 420चाईबासा 00 280पलामू 00 2800रामगढ़ 00 1330 स्थान हाइपोथर्मिया ठंड जनित के मरीज बीमारी हाइपोथर्मिया व फ्रास्टबाइट नामक बीमारी बढ़ने का मुख्य कारण लोगों कोठंड में बरती जाने वाली लापरवाही है। जब मनुष्य के शरीर का तापमानवातावरण के तापमान से ज्यादा नीचे चला जाता है, तब वह इस बीमारी केचपेट में आता है। मनुष्य के शरीर का तापमान 35.05 डिग्री निर्धारित है,जब तापमान इससे काफी अधिक नीचे जाने लगता है, तब यह बीमारी होनेकी आशंका काफी अधिक होती है। ऐसे में ठंड बढ़ने के कारण बहुत सेलोग बुजुर्ग परिजन और बच्चों को खिड़कियों के पास सुलाने, बच्चे कोलापरवाही के साथ जमीन पर ही छोड़ देने या फिर जमीन पर ही सुलाने,ठंड पानी, बासी भात, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम आदि का सेवन करने कीवजह से यह बीमारियां हो रही हैं।


