ठगी का मामला:पांच माह में 6000 म्यूल खाते बंद करवाए, इनमें 70% छत्तीसगढ़ के, 300 करोड़ रुपयों का किया ट्रांजेक्शन

सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से दोस्ती करता था आरोपी, फिर उनके माध्यम से हैंडल करता था खाते ठगी-सट्‌टे के पैसे मिनटों में म्यूल खातों में करते थे ट्रांसफर, युवक-युवती भोपाल से गिरफ्तार ऑनलाइन ठग गिरोह और सटोरियों का खाता हैंडल करने वाला जालसाज व उसकी महिला मित्र को पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को कोर्ट से दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार जौनपुर (यूपी) का 27 वर्षीय राहुल यादव 10 प्रतिशत कमीशन पर ठग और सटोरी गैंग के पैसों को मिनटों में कई म्यूल खातों में ट्रांसफर करने का काम करता था। राहुल अपनी महिला मित्रों के माध्यम से पैसे एक के बाद एक अलग-अलग खाते में ट्रांसफर करवाता था। ऐसा इसलिए ताकि पुलिस पैसों को ट्रैक कर उसे होल्ड न करवा सके। राहुल और काजल से ऐसे 40 खातों के दस्तावेज मिले हैं। राहुल टूर एंड ट्रेवल का काम करता है। उसने अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी गुजरात की बनाई है। हालांकि वह जालना (महाराष्ट्र) में रहता है। वह शादीशुदा है, लेकिन सोशल मीडिया में खुद को अविवाहित बताकर युवतियों से दोस्ती करता है। फिर उन्हें म्यूल अकाउंट के इंतजाम का काम सौंपता है। उसने एक साल पहले ही भाटापारा में रहने वाली काजल से दोस्ती की थी। इसके बाद पैसों का लालच देकर उसे म्यूल अकाउंट हैंडल करने के काम में लगा दिया। खातों को हैंडल करने के एवज में राहुल को 10 प्रतिशत कमीशन मिलता है। पांच माह में 6000 म्यूल खाते बंद करवाए, इनमें 70% छत्तीसगढ़ के, 300 करोड़ रुपयों का किया ट्रांजेक्शन राजधानी रायपुर में में ठगों और सटोरियों के लिए खातों की व्यवस्था करने वाले सक्रिय हैं। पुलिस ने ऐसे लोगों की पहचान कर सूची तैयार की है। उनके लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही उनके ठिकानों पर छापेमारी की जाएगी।
पुलिस म्यूल खातों को भी लगातार बंद करवा रही है। पिछले पांच महीनों में 6000 से ज्यादा म्यूल खाते बंद कराए गए हैं। इनमें 3500 खाते छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों के हैं। बाकी खाते यूपी, बिहार, हरियाणा व दूसरे राज्यों के हैं। इन खातों में सट्टे और ठगी के पैसों का लेन-देन किया गया है। पुलिस की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि 70 फीसदी म्यूल खातों का उपयोग सट्टे के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा है, जबकि 30 फीसदी का उपयोग ऑनलाइन ठगी में हो रहा है। पुलिस का दावा है कि लगातार कार्रवाई की वजह से रायपुर में म्यूल खाते पहले जितनी तेजी से खोले जा रहे थे अब उसकी रफ्तार धीमी हो गई है। केवल रायपुर में 250 से ज्यादा ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने खाता खोला फिर ठगी व सट्‌टे के पैसों के लेन-देन के लिए बेच दिया। खाता मालिकों के साथ सिम कार्ड प्रोवाइडर और बैंककर्मी भी पकड़े गए हैं। ऑनलाइन ठगी की जांच में जितने भी खातों की जानकारी मिल रही है, उन्हें बंद कराया जा रहा है। इसके बाद ऐसे खातों का चैनल ढूंढा जा रहा है। ये भी पता लगाया जा रहा है कि इनमें कितना ट्रांजेक्शन हुआ। 2000 सिम को कराया बंद
रायपुर रेंज साइबर पुलिस और साइबर सेल अब तक 2000 सिम को बंद करवा चुकी है। इन नंबरों से ठगी करने के लिए फोन किया गया या फिर सट्टे का दांव लगाया जा रहा था। पैसे जमा होते ही आधे घंटे में ट्रांजेक्शन
पुलिस ने जिन म्यूल खातों को ब्लॉक कराया है, उनमें करीब 300 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ है। हालांकि अधिकांश मामले में ठगों व सटोरिए ने पैसे निकाल लिए हैं। खाते में जैसे ही पैसा आता है, आधे घंटे के भीतर उसे एक के बाद एक अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है। इसी के लिए अलग सिस्टम काम कर रहा है। एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने का काम राहुल करता था। एटीएम से पैसा निकालने वाले भी अलग लोग हैं। भास्कर एक्सपर्ट – मुकेश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट बैंकों को लेना होगा कड़ा फैसला
म्यूल खातों को लेकर बैंकों को कड़ा फैसला लेने की जरूरत है। पुलिस को इन खातों का उपयोग करने वाले सरगना तक पहुंचना चाहिए। क्योंकि 250 रुपए की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले को गिरोह 25-50 हजार रुपए तक देकर उसका बैंक खाता खुद ऑपरेट करते हैं।5 देश में खातों की व्यवस्था करने वाला बड़ा रैकेट काम कर रहा है। ये रैकेट चंद पैसों का लालच देकर गरीबों खासतौर पर देहाड़ी पर काम करने वालों का खाता खोलकर उसे ठगी व सट्‌टे का गैंग चलाने वालों को बेच रहे हैं। पुलिस जब कार्रवाई करती है तो गरीबों तक ही पहुंच पाती है। जबकि ठगी करने वाले असली सरगना बचे रहते हैं, क्योंकि सिम और खाता उनके नाम पर नहीं है। जिन लोगों ने खाते-सिम बेचे हैं, वे भी मास्टर माइंड या गिरोह के सरगना को नहीं जानते हैं। क्योंकि वे उनसे कभी मिले भी नहीं हैं।

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