अचानक रोक से परेशान लोग लगा रहे दफ्तरों के चक्कर खरसिया-नवा रायपुर और परिमलकसा रेलवे लाइन किस गांव से गुजरेगी, कलेक्टर को इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन रेलवे के अनुमोदन पर 35 गांवों पर रोक लगा दी। परेशान होकर किसान खरीदी-बिक्री, नामांतरण और बटांकन पर रोक हटाने के लिए कलेक्टोरेट पहुंच रहे हैं। अब कलेक्टर पत्र लिखकर रेलवे से पूछ रहे हैं कि लाइन कहां से गुजरेगी, उसका क्षेत्र क्या होगा, कितने खसरे प्रभावित होंगे। खसरे बैन होने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। वे जमीन की खरीदी-बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने खरसिया से सालिकराम रायपुर-परमालकसा तक 278 किलोमीटर नई डबल रेल बिछाने की मंजूरी दी है। रेलवे ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। लेकिन रेलवे ने जिला प्रशासन को यह जानकारी नही दी कि पटरी कहां से गुजरेगी और कितने खसरे प्रभावित होंगे। जिला प्रशासन ने रेलवे को पत्र लिखकर इसके लिए मार्गदर्शन मांगा है। रेलवे से जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन बैन हटाकर सिर्फ उन इलाकों में खरीदी-बिक्री पर रोक लाएगा जहां से रेलवे लाइन गुजरेगी। एसडीएम कार्यालय में रोज आ रहे फरियादी
सालिकराम डाहर अभनपुर निवासी हैं। रेलवे लाइन के चलते इनकी जमीन की खरीदी-बिक्री वैन है। पारिवारिक परेशानी के चलते वे अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, लेकिन नही बेंच पा रहे हैं। उन्होंने अभनपुर एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया है। एडीएम कार्यालय में रोजाना तीन से चार लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं। जानिए, कौन-कौन से गांव में लगी है जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक मंदिरहसौद में आलेसुर, पचरी, छड़िया, नाहरडीह, पथराकुण्डी, खरोरा, मांठ, बेलदारसिवनी, बुड़ेनी, खौली, टिकारी, डिघारी, नारा, रीवा, परसदा उमरिया, गुजरा, धमनी, गनौद। गोबरा नवापारा में खरखराडीह, नवागांव, तर्रा, थनौद, जामगांव, अभनपुर में गिरोला, बेलभाठा, उरला, अभनपुर, सारखी, कोलर, खोरपा, पलौद, ढोंढरा, खट्टी, परसदा आदि। रजिस्ट्री नहीं होने से भी परेशानी
ग्रामीण क्षेत्र में किसान खेती कर गुजर-बसर करते हैं। किसानों के पास कृषि के अलावा दूसरा आय का कोई जरिया नहीं होता। जरूरत पड़ने पर वे जमीन की खरीद-बिक्री भी करते हैं। ऐसे में जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने से किसानों को काफी दिक्कत आ रही है। रेलवे लाइन कहां से गुजरेगी, कितने खसरे आएंगे, इसकी जानकारी के लिए रेलवे को पत्र लिखा गया है। यह एक रूटीन प्रक्रिया है। इससे यह पता चल जाएगा कि कितने खसरे प्रभावित हो रहे हैं।
– गौरव सिंह, कलेक्टर रायपुर


