ठगी का मामला:रिटायर्ड प्रोफेसर दंपती को 28 दिन डिजिटल अरेस्ट रख 1.34 करोड़ ठगे

रिटायर्ड प्रोफेसर और निजी स्कूल में शिक्षिका रह चुकी उनकी पत्नी को 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 1.34 करोड़ रुपए ठगने का मामला सामने आया है। ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर डीडी नगर क्षेत्र में रहने वाले रिटायर्ड प्रोफेसर को कॉल किया। उन्हें बताया कि उनके मुंबई स्थित कैनरा बैंक के खाते में 247 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसमें उनका आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगे हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। ठगों ने सिग्नल एप इंस्टॉल करवा कर वीडियो कॉल किया और प्रोफेसर को कोर्ट का सेटअप दिखाकर धमकाया कि हमारे बताए खातों में रुपए नहीं डाले गए तो तुम्हारे बेटे पर एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया जाएगा, गोली मार दी जाएगी और उसे भारत नहीं आने दिया जाएगा। डर के कारण दंपती ने ठगों द्वारा बताए गए 10 से अधिक लोगों के खातों में 28 दिन में 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए जमा कर दिए। 13 दिसंबर को जब बेटा कनाडा से भारत आया और उसने खुद को सुरक्षित बताया, तब ठगी का सिलसिला रुका। पुलिस ने नाबालिग समेत जिन 10 आरोपियों के खातों में रुपए जमा हुए, उन्हें गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी अमित कुमार ने बताया कि ठगी असम से की गई थी। इसमें 4 आरोपी बिहार के हैं। रुपए मप्र, गुजरात, यूपी और बिहार के खातों से असम पहुंचे, जहां से क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कंबोडिया भेजे गए। मामले में कश्मीर और पाकिस्तान लिंक भी सामने आया है। एसआईटी ने जबलपुर से अशोक जायसवाल (61), सनी जायसवाल (34) सारांश तिवारी (18) और 17 साल के नाबालिग को पकड़ा। नीमच, गोरखपुर और बिहार से भी आरोपी पकड़े गए। आपबीती : कहीं जाते तो उन्हें बताकर जाते दंपती ने बताया, बेटे को गोली मारने और भारत नहीं आने देने की धमकी से हम ऐसे डरे कि घर से बाहर जाते तो उन्हें कॉल कर बताकर जाते थे। वे दिन में 3 से 4 बार वीडियो कॉल कर हम पर निगरानी रखते थे। उन्होंने कहा था कि बाहर जाओ तो बताकर जाना। किसी को बताया तो बेटे को मार देंगे। स्थिति यह हो गई थी कि हम पति-पत्नी ने आपस में बात करना बंद कर दिया। बैंक से रुपए निकालने,के मैसेज बेटे के मोबाइल पर जा रहे थे। उसने पूछा था कि इतने रुपए का क्या कर रहे हो। हमने ठगों के खातों में गोल्ड लोन लेकर रुपए डाले। हम मकान बेचने की तैयारी कर रहे थे। 13 दिसंबर को बेटा आया तो ठगों की असलियत खुली। हम रिपोर्ट नहीं करना चाहते थे लेकिन बेटे ने हिम्मत दी।

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