ठगी के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:आर्थिक अपराध की जांच में नहीं किया सहयोग; कोर्ट में कहा- झूठा फंसाया गया

रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मनीष रघुवंशी को जिला कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। आरोपी स्वराज इंडिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा रहा है। फरियादी सुनील सोलंकी की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोप है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने निवेशकों को अधिक ब्याज और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर बड़ी राशि एकत्र की, लेकिन बाद में न तो निवेश की रकम लौटाई गई और न ही वादा किए गए भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई। उसके खिलाफ 2022 में लसूडिया थाने में धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 409, 120-बी एवं मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम, 2000 की धारा 4 एवं 6(1) के तहत केस दर्ज है। कोर्ट में कहा-झूठा फंसाया है सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि मनीष रघुवंशी को झूठा फंसाया गया है और वह कंपनी का सिर्फ डायरेक्टर रहा है। वहीं फरियादी की ओर से एडवोकेट चंचल गुप्ता ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका पूरे निवेश घोटाले में महत्वपूर्ण रही है और निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़पी गई है। राज्य शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक अजय निमरोटे ने कोर्ट को अवगत कराया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। प्रकरण के अन्य सह-आरोपी फरार हैं। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने केस डायरी, दस्तावेजों और प्रकरण की परिस्थितियों का अवलोकन करते हुए कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही आरोपी मनीष रघुवंशी की अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया।

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