बजरंगी महतो | गिरिडीह गिरिडीह सदर प्रखंड के पिंडाटांड़ गांव में कभी वन भूमि पर फैले घने सखुआ के जंगल 10 वर्ष पूर्व पूरी तरह उजड़ चुके थे। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से केवल सूखे ठूंठ बचे थे, जिनसे नए पौधे निकलते तो थे, लेकिन मवेशी उन्हें खा जाते थे। जंगल की यह बिगड़ती स्थिति देख गांव के लोगों ने वर्ष 2015 में बैठक कर साझा प्रयास की शुरुआत की। ग्रामीणों ने ठूंठों से निकलने वाले पौधों को संरक्षित करने का संकल्प लिया और अपने जानवरों को जंगल में चरने से रोक दिया। न तो कोई पौधरोपण हुआ और न ही वन विभाग से कोई सहायता ली गई। फिर भी 101.90 एकड़ क्षेत्रफल में लगभग 10 हजार से अधिक पेड़, खासकर सखुआ के पेड़ फिर से लहलहाने लगे हैं। इस प्रयास को देखते हुए गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल ने 2020 में ग्रामीण वन समिति को 1 लाख की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। जंगल बचाने के िलए चलता है अभियान: जंगल बचाने के लिए बनाए गए नियम पिंडाटांड़ ग्रामीण वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि गांव में यह नियम बनाया गया कि यदि कोई व्यक्ति जंगल से पेड़ काटता है, तो उसे दंडस्वरूप एक पौधा लगाना अनिवार्य होगा। अब अगर किसी को शादी या अन्य समारोह में लकड़ी की जरूरत होती है, तो वह समिति से अनुमति लेकर केवल डाली काट सकता है। समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित होती हैं और आग से बचाव के िलए जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। इस पूरे अभियान में कोषाध्यक्ष संतोष कुमार वर्मा, वनपाल सचिव अमर विश्वकर्मा, सदस्य लखन वर्मा, मनीष कुमार, वीरेंद्र वर्मा, योगेश्वर वर्मा समेत 14 महिला और पुरुष सदस्य सक्रिय रूप से शामिल हैं।


