ठेकेदारों पर अफसर मेहरबान…:2.79 करोड़ की रॉयल्टी जमा नहीं, 1.66 करोड़ जुर्माना भी माफ

ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से निर्माण कार्यों में उपयोग किए गए मटेरियल की 2.79 करोड़ रुपए की रॉयल्टी जमा नहीं करवाई गई। ठेकेदारों ने अनुबंध की सामान्य शर्तों (जीसीसी) के अनुसार अनिवार्य तकनीकी स्टाफ भी तैनात नहीं किया। जीसीसी का पालन न करने पर 1.66 करोड़ रुपए का जुर्माना भी नहीं लगाया गया। यह गड़बड़ी प्रदेश में रोजगार और सामाजिक आर्थिक विकास नीति 2020-21 के तहत एमएसएमई समूहों के लिए बुनियादी ढांचा और सामान्य सुविधा केंद्र बनाने में हुई। वित्त विभाग ने यह आपत्ति एमएसएमई विभाग को भेजी है ताकि लघु उद्योग निगम के अफसरों का लचर रवैया उजागर हो सके, जिससे सरकार को 5.17 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। वित्त विभाग ने सभी विभागों से विधानसभा के पटल पर रखी गई कैग की रिपोर्ट में आई आपत्तियों पर कार्रवाई कर जवाब मांगा है। कैग की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गति धीमी है। 2020 में विधानसभा में आई रिपोर्ट पर अब कार्रवाई हो रही है। इससे रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई का औचित्य समाप्त हो जाता है। इसे देखते हुए पहली बार विधानसभा ने सीधे वित्त विभाग को कैग की रिपोर्ट भेजी है, जिसमें आपत्तियों का निराकरण समय सीमा में किया जाए और एक्शन टेकन रिपोर्ट लोक लेखा समिति के समक्ष रखी जा सके। सामान्य तौर पर 6 महीने के भीतर विधानसभा के पटल पर रखी जाने वाली रिपोर्ट में कार्रवाई की समय सीमा तय है। विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि विधानसभा की समितियों की रिपोर्ट पर विभागों की ओर से कार्रवाई की समय सीमा तय है, जिसका पालन किया जाना चाहिए। ये हैं अन्य विभागों की आपत्तियां, जिन पर मांगा जवाब

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *