लोहंडीगुड़ा| ब्लॉक के तारागांव में सीमित संसाधन और पानी की कमी के चलते खेती पर निर्भर चमरू राम के लिए परिवार का गुजारा कठिन था। छोटी जोत और सिंचाई सुविधा के अभाव में खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं हो पाती थी। 2024-25 में मनरेगा के तहत उनकी निजी जमीन पर आजीविका संवर्धन के तौर पर डबरी बनवाई गई। इससे उनके खेतों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इससे खेती की स्थिति पूरी तरह बदल गई। पानी मिलने के बाद चमरू राम ने साग-भाजी और मक्के की खेती शुरू की। डबरी में मछली पालन भी किया। इससे उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी होने लगी। चमरू राम को खेती और मछली पालन से लगभग 50 हजार रुपए की अतिरिक्त वार्षिक आय हुई।


