डाकू की सिर कटी लाश…पाकिस्तान में भी कांपते थे लोग:अफगानी लड़की के प्यार में क्राइम छोड़ बना था म्यूजिशियन, 36 साल पुराना केस, पार्ट–1

2 अक्टूबर 1988 शाम 5 बजे का वक्त जैसलमेर की एयरफोर्स कॉलोनी ऊंट गाड़ी आती है और एक घर के आगे जाकर रुक जाती है। ऊंट गाड़ी में कोई नहीं था। उत्सुकतावश लोग ऊंट गाड़ी के पास गए। वहां जो देखा, उसे देखकर सबके होश उड़ गए। ऊंट गाड़ी में एक लाश पड़ी थी। इससे भी खौफनाक था कि लाश का सिर नहीं था, सिर्फ धड़ था। ये लाश थी करणा भील की। करणा भील, जो कभी डाकू था। 50-60 के दशक में भारत हीं नहीं, पाकिस्तान में भी करणा का खौफ था। लोग उसके नाम से थर्राते थे। करणा भील भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर पर फैले रेगिस्तान में ऊंट पर बैठकर घूमता था। 8 फीट की मूंछें। हाथ में हमेशा कुल्हाड़ी। ऐसा डर था कि लोग रेगिस्तान से गुजरने से डरते थे। 60 के दशक के बाद अचानक करणा भील ने अपराध की दुनिया को छोड़ दिया। कुछ ही सालों में उसकी पहचान देश के जाने-माने नड़ वादक (बांसुरी जैसा म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट) के रूप में हो गई। करणा भील ने जब अपराध की दुनिया छोड़ दी थी, फिर क्यों उसकी हत्या हो गई? कौन था हत्यारा, जिसने उसका सिर काट दिया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पाकिस्तान और भारत दोनों जगह करता था लूट
करणाभील जैसलमेर का रहने वाला था। 8 फीट लम्बी मूंछें करणा भील की पहचान थी। भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर इलाके में लोगों को लूटता था। करणा के खिलाफ हत्या सहित 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे। उस समय भारत व पाकिस्तान के बीच कोई तारबंदी नहीं थी। ऐसे में करणा भील ने जैसलमेर के अलावा पाकिस्तान में भी कई क्राइम किए। करणाभील कई बार डकैती करने अफगानिस्तान भी जाता था। पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान और अफगानिस्तान की महिलाएं बड़े शौक से नड़ वादन सुना करती थीं। इसी दौरान उसकी मुलाकात अफगानी लड़की लाली से हुई। करणा नड़ बहुत अच्छा बजाता था। लाली इससे प्रभावित हो गई। नड़ का संगीत लाली को करणा के करीब ले गया। लाली करीब आई तो करणा अपराध की दुनिया से दूर हो गया। 1965 के करीब करणा भील ने डकैती छोड़ दी थी। उसने जैसलमेर में एक जमीन खरीदी थी। उसकी जमीन पर इलियास नाम के एक युवक ने भी अपना हक जताया। दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। विवाद इतना बढ़ा कि करणा ने इलियास को गोली मारकर हत्या कर दी। इलियास की हत्या का दोषी साबित होने पर करणा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे जेल भेज दिया गया था। करणा शरीर से काफी मजबूत था। बताया जाता है कि उसने अपने हाथों से ही जेल की दीवार को तोड़ दिया था और फरार हो गया। हालांकि कुछ ही महीने बाद पुलिस ने उसे पकड़कर फिर से जेल में डाल दिया। राष्ट्रपति ने माफ की सजा
करणा जेल में भी अपना नड़ बजाता था। उसने नड़ वादन में इतनी महारथ हासिल कर ली कि उसकी डकैत वाली पहचान मिटने लग गई थी। वह जेल में कई कार्यक्रम भी करता था। अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसे जेल से पैरोल दे दी गई थी। करणा के नड़ वादन की चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी। जैसलमेर आने वाले सरकारी वीआईपी के लिए भी करणाराम के नड़ कार्यक्रम कराए जाते थे। करणा भील के नड़ वादन को इतनी पहचान मिल चुकी थी कि उस समय जैसलमेर आए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने भी उसका कार्यक्रम देखा। वहां करणा के कला प्रेम को देखते हुए उसकी सजा को माफ कर दिया था। उसके बाद करणा भील एक आम आदमी की जिंदगी जीने लग गया था। घर के बाहर ऊंट गाड़ी में सिर कटी लाश
नड़ के अलावा 8 फीट की मूंछ भी करणा भील की पहचान का अहम हिस्सा था। मूंछ के लिए भी करणा भील का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज है। आज भी जैसलमेर में होने वाले फेस्टिवल में करणा भील की याद में मूंछ प्रतियोगिता कराई जाती है। अपराध को पूरी तरह से छोड़ चुका करणा भील अब अपने परिवार के साथ सामान्य जिंदगी बिता रहा था। उसकी उम्र भी 65 साल हो गई थी। 2 अक्टूबर 1988 का दिन आया। करणा हमेशा की तरह शाम को 4 बजे ऊंट गाड़ी लेकर पशुओं का चारा लेने के लिए निकला था। शाम को करीब 5 बजे जैसलमेर की एयरफोर्स कॉलोनी में एक बिना सवारी की ऊंट गाड़ी करणा भील के घर के आगे रुकी। ऊंट गाड़ी में एक सिर कटी लाश थी। पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में खुलासा हुआ कि ये लाश करणा भील की है। सवालों के जवाब जानने के लिए कल पार्ट-2 में पढ़िए आगे की कहानी

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