भास्कर न्यूज |गुमला डायन बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक अहम और सख्त फैसले में गुमला व्यवहार न्यायालय के एडीजे-वन प्रेम शंकर की अदालत ने सोमवार को बड़ा निर्णय सुनाया। अदालत ने घाघरा थाना क्षेत्र के डुको गांव निवासी 20 मई 2024 में सावित्री देवी की हत्या के मामले में दो आरोपितों लोहरा गोप और मतीराम गोप (दोनों निवासी घाघरा) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह मामला डायन बिसाही जैसी अमानवीय और अंधविश्वास पर आधारित प्रथा से जुड़ा हुआ है, जिसने एक निर्दोष महिला की जान ले ली। अदालत ने अपने फैसले के जरिए समाज में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि इस तरह की कुप्रथाओं और हिंसक अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना 20 मई 2024 की है। इस मामले में मृतका के पति सीताराम महतो ने घाघरा थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार, घटना के दिन सीताराम महतो अपने पशुओं को चराने के लिए जंगल की ओर गया हुआ था। उस समय घर में उसकी पत्नी सावित्री देवी अकेली थी। आरोपित मतीराम गोप व लोहरा गोप सावित्री देवी के घर में घुस आए और धारदार हथियार से हत्या कर दी।


