डिंडौरी में स्वास्थ्यकर्मियों ने सोमवार को कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने निलंबित फार्मासिस्ट विमला द्विवेदी और नर्सिंग ऑफिसर जयमती नंदेहा को बहाल करने की मांग की। इन दोनों को 6 फरवरी को कलेक्टर ने निलंबित किया था। उन पर रेफर किए गए मरीज रविंद्र मरावी की ऑक्सीजन की कमी से मौत का आरोप था। इस मामले में सिविल सर्जन ने 6 फरवरी को जिला जनसंपर्क अधिकारी को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि मरीज रविंद्र मरावी की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई, यह कहना सही नहीं है, जब तक कि पोस्टमार्टम न हुआ हो। सिविल सर्जन के अनुसार, मरीज को 4 फरवरी को सुबह 6:30 बजे परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन 7:30 बजे वे उसे घर ले गए। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल लाया गया। मेडिकल रिपोर्ट में मरीज के पेट में छाले के लक्षण थे। इलाज के दौरान सुधार न होने पर 5 फरवरी की सुबह उसे मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया। एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण जननी एक्सप्रेस से रेफर करने से पहले ड्यूटी डॉक्टर ने परिजनों को मरीज की गंभीर हालत के बारे में सूचित किया था। सिविल सर्जन ने आशंका जताई कि मरीज की मौत पेप्टिक अल्सर परफोरेशन से होने वाले शॉक के कारण परिवहन के दौरान हुई होगी। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था, जिससे मौत का सही कारण पता नहीं चल सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन की कमी से मौत का दावा पूरी तरह गलत है। सीएमएचओ को भी सौंपा था ज्ञापन 6 फरवरी को निलंबन आदेश जारी होने के बाद, 7 फरवरी को कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पांडेय को भी ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने दोनों कर्मचारियों को बिना नोटिस के एकतरफा निलंबित करने को गलत बताया था। कर्मचारियों ने तत्काल बहाली की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 10 फरवरी से जिला अस्पताल के सभी अधिकारी-कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। कलेक्टर ने जवाब देने के निर्देश सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्टर से मुलाकात की। निलंबित फार्मासिस्ट और नर्सिंग ऑफिसर ने भी अपना पक्ष रखा। कलेक्टर ने दोनों निलंबित कर्मचारियों को लिखित में अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।


