डिंडोरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए बनाए गए अमृत सरोवरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आरईएस विभाग की ओर से पहले चरण में करीब 88 अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया, जिन पर करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन वर्तमान में इनमें से अधिकांश तालाबों में पानी नहीं है। नेवसा गांव का उदाहरण नेवसा गांव में लगभग 60 लाख रुपए की लागत से दो साल पहले एक अमृत सरोवर का निर्माण किया गया था। लेकिन निर्माण कार्य में अनियमितताओं के कारण यह पूरी तरह से उपयोगी नहीं हो पाया। स्थानीय निवासी राजेश सिंह ने बताया कि निर्माण के दौरान इंजीनियरों की उचित निगरानी नहीं की गई और ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग किया। नतीजतन, तालाब में बारिश के मौसम में थोड़ा-बहुत पानी भरता है, जो अक्टूबर तक पूरी तरह सूख जाता है। आंकड़े और खर्च का विवरण विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों में अमृत सरोवरों के निर्माण पर कुल 40.80 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इनमें अमरपुर में 7.21 करोड़, बजाग में 3.86 करोड़, डिंडोरी में 8.59 करोड़, करंजिया में 4.99 करोड़, मेहदवानी में 5.82 करोड़, समनापुर में 6.44 करोड़ और शहपुरा में 3.85 करोड़ रुपए खर्च किए गए। अधिकारियों की स्वीकारोक्ति आरईएस विभाग के कार्यपालन यंत्री (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) डी.एस. मार्को ने स्वीकार किया कि प्रथम चरण में साइट चयन में गलती हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे चरण में इस तरह की गलतियां नहीं होंगी। अब निर्माण कार्य से पहले स्थल का उचित चयन और जांच की जाएगी। ग्रामीणों की समस्या और भविष्य की योजनाएं कुछ अमृत सरोवरों में मुरूम युक्त मिट्टी के कारण पानी का रिसाव हो रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इन समस्याओं को सुधारने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। हालांकि, कई तालाब ऐसे भी हैं जिनमें पानी उपलब्ध है और ग्रामीण उनका दैनिक उपयोग कर रहे हैं। कुछ सरोवर खेतों की सिंचाई के लिए भी उपयोगी साबित हो रहे हैं।


