दो दिन पहले जबलपुर में स्टेट साइबर सेल और एसटीएफ ने 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था।स्टेट साइबर सेल ने बुधवार को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दो सप्ताह का रिमांड लिया। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पता चला है कि सतना निवासी अनजर हुसैन ने दिल्ली, गुड़गांव, उत्तर प्रदेश, रायपुर, हरियाणा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में अपनी गैंग फैलाई हुई है। गैंग के सदस्य ग्रामीणों को चंद रुपए का लालच देकर उनका बैंक खाता किराए पर लेते, फिर इसके जरिए ना सिर्फ देश बल्कि दुबई में भी करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन करते थे। हालांकि इस गिरोह का सरगना दिल्ली में बैठे एक व्यक्ति को बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। स्टेट साइबर सेल का मानना है कि इस गिरोह में सैकड़ों लोग हो सकते हैं, जिनकी लगातार तलाश की जा रही है। मामले को एटीएस ने टेरर फंडिंग से जोड़कर डेढ़ साल पहले जांच शुरू की। एटीएस ने जांच में पाया कि ये साइबर फ्रॉड का मामला है। इसके बाद यह केस स्टेट साइबर सेल को ट्रांसफर किया गया। ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा मार्च 2024 में सतना निवासी सुरक्षा गार्ड केके गौतम अपने एक दोस्त की शाॅप पर पहुंचा। वहां उसे पता चला कि आधार कार्ड के जरिए भी बैंक बैलेंस पता किया जा सकता है। गौतम ने अपना आधार नंबर दोस्त को दिया। उसने चेक किया तो जानकारी मिली कि खाते में 1 लाख 9 हजार रुपए जमा थे। गौतम ने अपने दोस्त को बताया कि उसके खाते में कभी इतने पैसे जमा नहीं थे। गौतम अपने खाते की जानकारी लेकर सतना के इंड्सइंड बैंक पहुंचा और मैनेजर को जानकारी दी। सतना के ही आधा दर्जन से अधिक लोगों के खाते में भी करोड़ों रुपए का ट्रांसफर यूपीआई के जरिए होने की जानकारी सामने आई। कम पढ़े-लिखे लोगों को बनाते थे निशाना गैंग में अधिकतर लड़के पढ़े-लिखे थे। इनका टारगेट गांव के कम पढ़े-लिखे लोग होते थे। साइबर ठग बैंक खाता खुलवाने के नाम पर ग्रामीणों से आधार कार्ड और खाता खुलवाने के लिए अन्य दस्तावेज मांगते। फिर फोटो एडिट कर खाता खुलवाते। इस दौरान ओटीपी के लिए ठग अपना मोबाइल नंबर देते। बाद में इसी नंबर के आधार पर रुपए ट्रांसफर किया करते थे। ठगी के लिए सिर्फ प्राइवेट बैंक का उपयोग करते थे, क्योंकि यहां खाता बड़ी आसानी से खुल जाता है।


