छत्तीसगढ़ के डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को शुक्रवार को 67 दिन पूरे हो गए। अभ्यर्थी 2300 खाली पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मेरिट लिस्ट में नाम आने और कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक नौकरी नहीं दी गई। कैंडिडेट्स के मुताबिक 25 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा उनके क्षेत्रीय विधायक के जरिए सदन में उठाया गया था। इस दौरान छह अभ्यर्थी वैध अनुमति लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि पुलिस ने केवल कैंडिडेट्स को गिरफ्तार नहीं किया बल्कि मेंटली टॉर्चर भी किया। जबरन बान्ड भी साइन करा लिया, बान्ड तोड़ने पर एक लाख जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मीडिया कर्मियों से बातचीत और अपनी मांग रखने पर कार्रवाई की धमकी दी है। अपना दर्द कैंडिडेट्स ने भास्कर ऑफिस आकर बयां किया। उन्होनें बताया-पुलिस के लोग देर रात तूता धरना स्थल पहुंचकर उन्हें धमकाते हैं। प्रदर्शन रोकने के लिए दबाव बनाते हैं। गंदी गालियां भी देते हैं। ये सब बताते हुए कुछ गर्ल्स कैंडिडेट पुलिसिया कार्रवाई से इतनी डरी हुई थीं कि कैमरा तक फेस करने की हिम्मत नहीं कर पाईं। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले बॉन्ड की चार बड़ी बातें: पुलिस की ओर भरवाए गए बॉन्ड में D.Ed अभ्यर्थियों से यह लिखवाया गया है कि वे 25 मार्च 2026 तक अपना आंदोलन स्थगित रखेंगे। इस अवधि के दौरान वे किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेंगे। बॉन्ड में साफ तौर पर लिखा गया है कि विधानसभा सत्र के दौरान अभ्यर्थी किसी भी धरना, रैली, जुलूस या प्रदर्शन में न तो शामिल होंगे और न ही किसी को इसके लिए प्रेरित करेंगे। इसके अलावा, विधानसभा सत्र की अवधि में विधानसभा परिसर या उसके आसपास जाने पर भी रोक लगाई गई है। बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक, अभ्यर्थी किसी को भी फोन, मैसेज या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धरना-प्रदर्शन के लिए बुलावा नहीं देंगे। यानी आंदोलन से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई अभ्यर्थी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी डर के चलते कई अभ्यर्थियों ने मजबूरी में बॉन्ड भरने की बात कही है। अभ्यर्थियों में नाराजगी, सवालों के घेरे में कार्रवाई इस कार्रवाई को लेकर D.Ed अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन बॉन्ड के जरिए उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद ये पूरा मामला प्रशासनिक और संवैधानिक सवालों के घेरे में आ गया है।
6 डीएड अभ्यर्थियों को पुलिस ने जबर्दस्ती हिरासत में लिया
डीएड अभ्यर्थियों ने दैनिक भास्कर को बताया 24 फरवरी को उनके साथी विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए थे। शांति से उन्होंने कार्यवाही देखी। 25 फरवरी को भी वो कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे थे। पुलिस का निर्देश था कि कहीं भी जाने की जानकारी उन तक पहले पहुंचा दें। ऐसे में इस बारे में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को पहले ही सूचना दी गई थी। इसके बावजूद प्रवेशिका बनाने के दौरान सैकड़ों की भीड़ में से पुलिस ने 6 डीएड अभ्यर्थियों को फिल्टर करते हुए हिरासत में ले लिया। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 170 के तहत केस दर्ज किया। यानी वो प्रिवेंटिव धारा जिसके तहत पुलिस किसी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है, अगर उस व्यक्ति पर यह शक हो कि वह शांति भंग कर सकता है, कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकता है या कोई गलत काम करने वाला है। ये धारा पुलिस को उससे बॉन्ड भरवाने का अधिकार भी देती है। मंत्रियों के बंगले में पेट्रोल फेंकने जैसे गंभीर आरोप कैंडिडेट्स ने बताया पुलिस ने उनपर विधानसभा में नुकसान पहुंचाने और मंत्रियों के बंगले में पेट्रोल फेंकने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। जोकि गलत और बेबुनियाद हैं, वो कोई उत्पात या प्रदर्शन की मंशा से विधानसभा नहीं गए थे। बस अपने सवालों का जवाब सुनने गए हुए थे।
कॉल आते ही पुलिस ने बदल दिया रूट कैंडिडेट्स ने बताया पुलिस उन्हें विधानसभा से गाड़ी में बैठाकर तूता धरना स्थल वापस छोड़ने जा रही थी। लेकिन इसी बीच गाड़ी में बैठे पुलिसकर्मियों को किसी ने काल पर निर्देश दिए। ये निर्देश मिलते ही वो तूता की जगह उन्हें एसडीएम कार्यालय ले जाया गया, जहां सबसे पहले आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाया गया। मीडिया से दूरी बनाने को कहा गया। इन दोनों बात से मना किया तो अंत में दबाव और जेल भेजने का डर दिखाकर बॉन्ड भरवा लिया गया। आधी रात को नींद से जगाकर धमकाया कैंडिडेट्स ने बताया पुलिस लगातार उन्हें मेंटल टॉर्चर कर रही है। दिन में बहस-कार्रवाई तक तो ठीक था, लेकिन पुलिस के जवान उन्हें रात को भी आकर परेशान करते हैं। पिछले दिनों पुलिस आधी रात को अचानक तूता धरना स्थल पहुंची। बड़े चबूतरे पर जहां महिला कैंडिडेट्स भी सोई हुई थीं, वहां पहुंचकर पहले उन्हें नींद से जगाया। गंदी गालियां दी, प्रदर्शन खत्म करने का दबाव किया। इस दौरान वीडियो बना रहे कैंडिडेट का फोन भी छीन लिया गया। लगातार उन हैरास किया जा रहा है। महिला कैंडिडेट्स ने बताया कि उन्हें अब सेफ फील नहीं होता। धरना जारी रखेंगे कैंडिडेट्स ये सबकुछ घटने के बाद भी अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक खाली पदों पर उनकी नियुक्ति नहीं हो जाती वो प्रदर्शन जारी रखेंगे। वो किसी दबाव या कार्रवाई के सामने झुकेंगे नहीं।


