डीग के तालाबों में गंदे पानी, मरती मछलियों और घाटों की सफाई की मांग को लेकर पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में लोग आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। गिरीश शर्मा ने बताया कि डीग जिले के लगभग 3000 घरों का सीवरेज का पानी सीधे तालाबों में आता है। कई लोगों ने शौचालय के टैंक भी नहीं बनवा रखे हैं, जिससे मल-मूत्र सीधे तालाबों में मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मल के महीने में जब 84 कोस परिक्रमा होती है, तो लाखों श्रद्धालु इन तालाबों में स्नान करते हैं। श्रद्धालु प्रसाद के रूप में यही बदबूदार जल ग्रहण करने को मजबूर होते हैं। हजारों पर्यटक जल महल देखने आते हैं, लेकिन तालाबों के बदबूदार पानी को देखकर उनका मोहभंग हो जाता है। शर्मा के अनुसार, जब भी सफाई की बात आती है, तो तीनों संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप देते हैं। गंदा पानी तीन विभागों के बीच अटका हुआ है, जिसके कारण तालाबों में मछलियां मर रही हैं। अनशनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक गटर का पानी तालाबों में आना बंद नहीं होता और घाटों की उचित सफाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। इस अनशन में जतिन गुप्ता, रघुवीर सैनी, शंकर सैनी, नरेश सैनी, देवेंद्र, गोविंद, राजीव कुलश्रेष्ठ, बबलू और कन्हैया डागुर सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।


