सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को झारखंड का डीजीपी नियुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी. अनजारिया की पीठ में याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी और डीजीपी की ओर से पक्ष रखा गया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल को पक्ष रखना था। लेकिन दूसरे कोर्ट में होने की वजह से उन्होंने पक्ष रखने के लिए समय मांगा। इसके बाद अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तिथि निर्धारित की। इससे पहले सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार के मामले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकारों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का उल्लंघन किया जा रहा है। इसलिए डीजीपी की नियुक्ति के लिए वही प्रक्रिया लागू कर दी जाए, जिस प्रक्रिया के तहत सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति होती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को गलत बताते हुए अवमानना याचिका दाखिल की है। वहीं, डीजीपी की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई पेंडिंग नहीं है। प्रकाश सिंह मामले में जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उसके मुताबिक उनकी नियुक्ति सही है। साक्ष्य के अभाव में नक्सली कुंदन पाहन हो गया बरी जेल में बंद कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन को पुलिस पर हमले के एक पुराने मामले में अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। वर्ष 2009 की इस घटना में अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में मात्र दो गवाह पेश किए गए। जो कुंदन पाहन के खिलाफ लगे आरोपों को साबित नहीं कर सके। कुंदन पाहन 14 मई 2017 से जेल में बंद हैं।


