डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, यूपीएससी, डीजीपी, केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। मामले की सोमवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए 16 जून को सुनवाई निर्धारित की। डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने चुनौती दी है। मरांडी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 25 जुलाई 2024 को अनुराग गुप्ता को प्रभारी डीजीपी बनाया गया था। यह 3 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। फिर, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद 28 नवंबर 2024 को तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह को पद से हटाकर अनुराग गुप्ता को प्रभारी डीजीपी बना दिया गया। यह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी के अनुशंसित पैनल द्वारा की जाती है। लेकिन हेमंत सरकार ने यूपीएससी को दरकिनार कर अपनी मर्जी से उन्हें डीजीपी बना दिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक राज्य सरकार कोई नया कानून नहीं बनाती, तब तक यूपीएससी की प्रक्रिया से ही नियुक्ति होगी। मरांडी ने यह भी कहा था कि वह चुनावी कदाचार में लिप्त पाए गए थे। दो वर्षों तक सस्पेंड भी रहे। उन पर एफआईआर दर्ज हुई। चुनाव आयोग ने उन्हें चुनावी कार्य से दूर भी रखा। इसके बावजूद सरकार ने भ्रष्ट, दागदार और विवादास्पद पदाधिकारी को डीजीपी बना दिया। हेमंत सरकार ऐसे पदाधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी देकर उन्हें बचाना चाहती है? यह सही नही है।


