डीडवाना के बिंचावा गांव में रविवार शाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विजयदशमी उत्सव और पथ संचलन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकता और राष्ट्रभावना का अद्भुत प्रदर्शन किया। पथ संचलन का शुभारंभ गुलाब भारती की बगीची से हुआ, जो गांव के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए पुनः उसी स्थान पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अखिल भारतीय सांगलिया धूनी पीठ के महंत हरिदास महाराज, जिला संघचालक रामावतार सर्राफ और खंड कार्यवाह रेखाराम जाखड़ मौजूद रहे। मुख्य वक्ता जिला संघचालक रामावतार सर्राफ ने विजयदशमी को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष 2 अक्टूबर 2025 से विजयदशमी 2026 तक मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत वर्षभर सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रजागरण कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने “पंच परिवर्तन” सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, परिवार प्रबोधन और स्वदेशी जागरण पर बल देते हुए बताया कि संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। महंत हरिदास महाराज ने अपने उद्बोधन में जातिगत भेदभाव मिटाने और सामाजिक समरसता स्थापित करने के संघ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र को परम वैभव की ओर अग्रसर करने के इस कार्य में सहभागी बनें। इस अवसर पर सैकड़ों स्वयंसेवकों ने घोष की ताल पर कदमताल करते हुए अनुशासन और एकता का प्रदर्शन किया। मार्ग में ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, मातृशक्ति ने दर्जनों स्थानों पर रंगोलियां बनाकर अभिनंदन किया और गांव के मुख्य मार्गों पर स्वागत द्वार सजाए गए। पूरे गांव में देशभक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा कि स्वयंसेवकों का अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। इस आयोजन ने गांव में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य की भावना को और मजबूत किया।


