डीडवाना में रबी की फसलें बोने वाले किसान इन दिनों निराश्रित गोवंश से परेशान हैं। खेतों में खड़ी फसलों को बेसहारा पशु भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट मंडरा रहा है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में कंटीले तार, बांस-बल्ली और कंटीली झाड़ियों से बाड़ लगा रहे हैं। इसके बावजूद आवारा गोवंश और नीलगाय के झुंड इन सुरक्षा घेरों को तोड़कर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई किसानों को रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। पशुओं के झुंड ने चिंता बढ़ाई
किसान घासीराम और शोदानाराम बुगालिया ने बताया कि पहले नीलगाय मुख्य समस्या थी, लेकिन अब लावारिस गोवंश का प्रकोप बढ़ गया है। शोदानाराम ने कहा कि इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, जिससे आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती, लेकिन पशुओं के झुंड चिंता बढ़ा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं विश्व जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष परसाराम बुगालिया ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गौशालाओं को अनुदान दिया जाता है, लेकिन कई गौशाला संचालक अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गौ सेवा के नाम पर चंदा एकत्र करने वाले कई संगठन गोवंश को सड़कों पर भूखा-प्यासा भटकने को मजबूर कर रहे हैं। किसानों की मेहनत हो रही बर्बाद
बुगालिया ने आगे कहा कि सड़कों पर घूमते पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद किसान अपनी फसलों को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। यह समस्या अब किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन गई है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि निराश्रित गोवंश की उचित व्यवस्था की जाए और उन्हें गौशालाओं में पहुंचाया जाए। इससे किसानों की फसलें और उनकी आजीविका सुरक्षित रह सकेगी।


