भास्कर न्यूज | जशपुरनगर विकासखंड कुनकुरी का प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली इन दिनों जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विद्यालय के बच्चे केवल कक्षा में बैठकर किताबों से ही शिक्षा नहीं ले रहे, बल्कि स्कूल परिसर में विकसित की गई ‘पोषण वाटिका’ में मेहनत कर उन्नत कृषि के व्यावहारिक गुर भी सीख रहे हैं। बच्चों की इस मेहनत का सुखद परिणाम तब सामने आया, जब स्कूल की वाटिका में उगाए गए ताजे आलू बच्चों को उपहार स्वरूप घर ले जाने के लिए वितरित किए गए। शरद ऋतु के दौरान विद्यालय की पोषण वाटिका में प्रधान पाठक एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन में आलू की फसल लगाई गई थी। बच्चों ने स्वयं खेत की तैयारी, बीज रोपण, निराई-गुड़ाई और सिंचाई जैसे कार्यों में भाग लिया। हाल ही में फसल की खुदाई की गई, जिसमें लगभग ढाई क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने निर्णय लिया कि उत्पादित आलू का अधिकांश भाग बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि उन्हें ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकें। शेष बचे आलू को विद्यालय के प्रत्येक बच्चे के बीच 2.5 किलोग्राम के हिसाब से वितरित किया गया। जब बच्चे अपने हाथों से उगाई गई फसल को घर ले जाने लगे, तो उनके चेहरों पर गर्व, खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया। यह अनुभव बच्चों के लिए सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि मेहनत और धैर्य का प्रतिफल था। प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता ने बताया कि यह पोषण वाटिका केवल खेती का स्थान नहीं, बल्कि एक खुली प्रयोगशाला की तरह है। यहां बच्चे प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से विभिन्न विषयों को सीखते हैं। गणित के अंतर्गत बच्चे मिट्टी का मापन, आकृतियों की समझ, अनुमान लगाना और लाभ-हानि की गणना करना सीखते हैं। पर्यावरण अध्ययन में मिट्टी के प्रकार, पौधों की जड़, तना और पत्तियों की संरचना के साथ उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी दी जाती है। वहीं कृषि तकनीक के माध्यम से बच्चों को फसल चक्र और खेती से होने वाले आर्थिक लाभों की समझ विकसित होती है। इस पोषण वाटिका को हरा-भरा और सफल बनाने में प्रधान पाठक लव कुमार गुप्ता, शिक्षक महेश तिर्की, इको क्लब के सदस्यों तथा विद्यालय के अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा है। इस पहल के कारण बच्चों को प्रतिदिन मिड-डे मील में ताजी, स्वच्छ और रसायन मुक्त सब्जियां मिल रही हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य भी बेहतर हो रहा है।


