डीसी ने 13 अफसरों को दिया रजिस्ट्री करने का अधिकार, तीनों तहसीलों में 17 अप्वाइंटमेंट मगर कोई दस्तावेज तस्दीक नहीं

डीसी से पीसीएस अफसरों और कानूनगो को रजिस्ट्रेशन का अधिकार सौंप दिया। जिससे सब-रजिस्ट्रारों के पास रजिस्ट्री करने के पॉवर खत्म हो गए। यदि दस्तावेज तस्दीक कराते तो डीसी के आदेशों का उल्लंघन होता। जब तक डीसी आदेश को वापस नहीं लेते सब-रजिस्ट्रार रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम नहीं कर पाएंगे। उधर, जिनकी ड्यूटी रजिस्ट्री के लिए लगाई गई उनके आईडी ही नहीं बने थे। डीसी से जारी आदेश के मुताबिक सब-रजिस्ट्रार-1 की जगह रजिस्ट्री करने के लिए एसडीएम-1, सब-रजिस्ट्रार-2 के लिए एसडीएम-2, सब-रजिस्ट्रार अजनाला की जगह एसडीएम अजनाला, सब-रजिस्ट्रार बाबा बकाला में एसडीएम बाबा बकाला, सब-रजिस्ट्रार दफ्तर लोपोके में एसडीएम लोपोके, सब-रजिस्ट्रार-3 कार्यालय में असिस्टेंट कमिश्नर जनरल को रजिस्ट्री करने की जिम्मेदारी सौंपी। जबकि सब-रजिस्ट्रार मजीठा में कानूनगो संजीव देवगन, रमदास में कानूनगो कारज सिंह, राजासांसी में कानूनगो राजीव कुमार, अटारी में कानूनगो गुरइकबाल सिंह, जंडियाला गुरू में कानूनगो राजेश कुमार, तरसिक्का में लखविंदर सिंह, ब्यास में रणजीत सिंह की ड्यूटी लगाई गई। बता दें कि रेवेन्यू ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से लिए फैसले के अनुसार सब-रजिस्ट्रारों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने रजिस्ट्रियों का काम छोड़कर एफिडेविट, इंतकाल, एससी -बीसी और दूसरे सर्टिफिकेट का ही निपटारा कराया। वहीं सीनियर एडवोकेट राकेश शर्मा ने कहा कि हड़ताल करना हर किसी का अधिकार है मगर लोगों का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए। 3 तहसीलों में 2 दिन में 400 एफिडेविट तो 350 एससी-बीसी-रेजीडेंस-इनकम सर्टिफिकेट का निपटारा गया गया। एफिडेविट की बात करें तो तहसील-2 के करीब 180 तो तहसील-1 के 120 और सब-रजिस्ट्रार-3 में 100 एफिडेविट शामिल हैं। 200 सर्टिफिकेट तहसील व तो 150 टू में निपटारा कराया गया। वहीं सीनियर एडवोकेट महिंदपाल गुप्ता का कहना है कि रेवेन्यू अफसर यूनियन को हड़ताल का रास्ता छोड़ कानूनी लड़ाई करा रास्ता अपनाना चाहिए। दूसरे देशों-स्टेट से लोग अप्वाइंटमेंट लेने के लिए आते हैं। अप्वाइंटमेंट का मतलब है कि उन्हें रजिस्ट्री कराने के लिए समय मिल चुका है। लाखों-करोड़ों का स्टांप लेते हैं। पार्टियों में लेन-देन होती है। जिन्होंने अप्वाइंटमेंट ले ली तो काम रुकना नहीं चाहिए। यदि रजिस्ट्री नहीं हुई तो मुश्किलें उठानी पड़ती है। यदि गलत तरीके से वि​िजलेंस ने फंसाया तो कोर्ट में लड़ाई लड़ें। भास्कर न्यूज | अमृतसर सब-रजिस्ट्रारों और तहसीलदारों के खिलाफ वि​जिलेंस की आए दिन छापेमारी से तंग होकर हड़ताल पर जाने के बाद पंजाब सरकार और रेवेन्यू अफसर आमने-सामने आ गए हैं। बीते 3 फरवरी को बठिंडा डीसी ने सब-रजिस्ट्रार की जगह कानूनगो को रजिस्ट्री करने का अधिकार सौंपा था। 4 फरवरी को अमृतसर की डीसी साक्षी साहनी ने पीएसीएस अफसरों और कानूनगो समेत 13 को रजिस्ट्री करने का अधिकार देने के आदेश जारी किया। फिलहाल, रजिस्ट्री दफ्तरों में रजिस्ट्रेशन का काम शुरू करने के लिए पीसीएस अफसरों और कानूनगो की आईडी बनाने में करीब 3 दिन लग जाएंगे। जिसके बाद ही रजिस्ट्री से जुड़े काम कर सकेंगे। सोमवार को 3 सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में 17 पार्टियों ने रजिस्ट्री करवाने के लिए अप्वाइंटमेंट लिया था मगर कोई दस्तावेज शाम 5 बजे तक तस्दीक नहीं हो पाया। सबसे अधिक तहसील-2 से 14 तो तहसील-1 से 2 पार्टियों ने अप्वाइंटमेंट लिया था। सब-रजिस्ट्रार-3 दफ्तर में रजिस्ट्री के लिए 1 अप्वाइंटमेंट लिया गया था।

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