विश्वविख्यात मरु महोत्सव-2026 के तीसरे दिन शनिवार को जैसलमेर की स्वर्ण आभा ‘सम-लखमणा’ के रेतीले धोरों पर बिखर गई। मरुधरा की समृद्ध विरासत, साहसी खेलों और सुरम्य संगीत के इस महाकुंभ में लोक संस्कृति का ऐसा रंग चढ़ा कि देशी-विदेशी पर्यटक थिरकने को मजबूर हो गए। सुबह जहां ऊंटों के पैरों की धमक ने रोमांच पैदा किया, वहीं शाम को सेलिब्रिटी गायक राज बर्मन की मखमली आवाज ने रेगिस्तान की खामोशी में सुरीली हलचल पैदा कर दी। ऊंटों का हैरतअंगेज नृत्य और रोमांचक दौड़ सम-लखमणा के धोरों पर कार्यक्रम का आगाज राजस्थानी परंपरा के अनुसार हुआ। सजे-धजे रेगिस्तान के जहाजों (ऊंटों) ने अतिथियों का माला पहनाकर स्वागत किया। महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण ऊंट दौड़ प्रतियोगिता रही, जिसमें कुल 38 ऊंटों ने भाग लिया। रेत के समंदर में दौड़ते इन ऊंटों ने दर्शकों की सांसें थाम दीं। प्रथम स्थान: हनीफ खान का ऊंट (11,000 रु. पुरस्कार) द्वितीय स्थान: अयूब खान का ऊंट (7,500 रु. पुरस्कार) तृतीय स्थान: कबीर का ऊंट (5,100 रु. पुरस्कार) विजेताओं को ट्रॉफी और प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया। ऊंटों द्वारा प्रस्तुत करतबों और गीतों की धुन पर उनके नृत्य ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रस्सा-कसी: विदेशी मेमों पर भारी पड़ीं मरूधरा की महिलाएं धोरों पर आयोजित रस्सा-कसी प्रतियोगिता में भारत बनाम विदेशी पर्यटकों का कड़ा मुकाबला देखने को मिला। महिला वर्ग के मुकाबले में भारतीय महिलाओं ने अपनी शक्ति और तालमेल का प्रदर्शन करते हुए विदेशी पर्यटकों को धूल चटाई और जीत का परचम लहराया। वहीं, पंजाबी ढोल वादकों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने माहौल में जोश भर दिया। राज बर्मन के गीतों पर थिरकी रेत सूर्यास्त के बाद सम के लखमणा ड्यून्स पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। इसकी शुरुआत उगम दान एंड पार्टी ने ‘वारी जाऊं रे… सतगुरु आंगन आया…’ गुरु वंदना से की। इसके बाद: रमेश-पारस: ‘बना रे बागा में झूला डालिया’ पर रिंग नृत्य कर वाहवाही लूटी। मोती खान: ‘केसरिया बालम’ और ‘घूमर’ से राजस्थानी मिट्टी की खुशबू बिखेरी। संगीता सपेरा: कालबेलिया नृत्य की चपलता ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। जलाल व अख्तर खान: ‘धमा-धम मस्त कलंदर’ और ‘लाली मेरे लाल की’ जैसी सूफी व लोक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। रात ढलने के साथ ही मंच संभाला सेलिब्रिटी गायक राज बर्मन ने। उन्होंने ‘तेरे इश्क में’, ‘तू ही तू है खुदा’ और ‘हवाएं-हवाएं’ जैसे बॉलीवुड हिट्स गाकर युवाओं और पर्यटकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया। पर्यटन व्यवसायियों की आवभगत ने जीता दिल सम कैम्प एण्ड रिसोर्ट वेलफेयर सोसायटी के प्रयासों से इस वर्ष पर्यटकों की रिकॉर्ड तोड़ उपस्थिति रही। सोसायटी के पदाधिकारी कैलाश व्यास, गुलाम कादर, उपेन्द्र सिंह राठौड़ एवं बबलू भाई ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रशासन की ओर से उपखंड अधिकारी सक्षम गोयल, सहायक जिला कलक्टर रोहित वर्मा सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन विजय बल्लानी ने किया। सम के धोरों पर उमड़ा जनसैलाब यह बताने के लिए काफी है कि मरु महोत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर राजस्थान की पहचान बन चुका है।


