डेढ़ महीने के अंदर अमित शाह का दूसरी-बार बस्तर दौरा:बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का करेंगे समापन, नक्सल मामले में कर सकते हैं बड़ा ऐलान

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कल (9 फरवरी) को एक दिवसीय बस्तर दौरे पर रहेंगे। वे जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम के समापन समारोह में शामिल होंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब बस्तर संभाग में सुरक्षा हालात और नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर लगातार बड़ी कार्रवाई चल रही है। बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की गई है। पिछले करीब डेढ़ महीने के अंदर अमित शाह का ये दूसरी बार बस्तर दौरा है। ऐसा माना जा रहा है कि अमित शाह बस्तर पंडुम के इस मंच से नक्सल मामले को लेकर कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं। उनके बस्तर दौरे को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लाल बाग मैदान में चल रहा कार्यक्रम जगदलपुर के लाल बाग मैदान में अमित शाह आएंगे। यहां शाह के दौरे को लेकर तीन लेयर में सुरक्षा व्यवस्था की गई है। केंद्रीय सशस्त्र बल, राज्य पुलिस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है। बस्तर IG सुंदरराज पी की मानें तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल, एयरपोर्ट, आवागमन मार्ग में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। एक ही मंच में बस्तर की संस्कृति और परंपरा बस्तर पंडुम के समापन समारोह में संभाग के कई जिलों से आए जनजातीय कलाकार अपनी लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य और वाद्य यंत्रों के माध्यम से बस्तर की पहचान को मंच पर प्रस्तुत करेंगे। स्कूली छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का खास आकर्षण रहेंगी। नक्सल एंगल के लिहाज से खास माना जा रहा है दौरा अमित शाह का यह दौरा नक्सली एंगल के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में बस्तर में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई है, जिसमें कई नक्सली ठिकानों को ध्वस्त किया गया है और संगठन को लॉजिस्टिक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। ऐसे माहौल में केंद्रीय गृहमंत्री का बस्तर आना यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार नक्सल गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए है और जमीनी हालात की प्रत्यक्ष समीक्षा को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, प्रशासनिक और सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह दौरा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से स्थानीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ना और विकास के प्रति भरोसा मजबूत करना भी इस दौरे का अहम पहलू है। यह संदेश देने की कोशिश है कि बस्तर की पहचान सिर्फ संघर्ष से नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और संभावनाओं से भी जुड़ी है। अमित शाह का बस्तर दौरा एक संतुलित रणनीति का प्रतीक माना जा रहा है, जहां एक ओर सुरक्षा और नक्सल उन्मूलन को लेकर सख्ती है, वहीं दूसरी ओर संवाद, संस्कृति और विकास के माध्यम से विश्वास कायम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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