लालबाग में डेढ़ साल पहले हुई मजदूर की हत्या के आरोपी को पुलिस ने आगरा से गिरफ्तार किया है। आरोपी सेना में पैरा कमांडो रह चुका है। वह पैसों को लेकर अपने साथी से हुए विवाद के बाद उसे खुद की हत्या के आरोप में उसे फंसाना चाहता था। आरोपी पर पहले से गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में सात अपराध दर्ज हैं। 25 मई 2024 को कुंडी भंडारा रोड पर अधजला शव पुलिस को मिला था। शव की जेब में हुसनसिंह पिता गंगाराम ने अपने दस्तावेज रख दिए थे। पूर्व पैरा कमांडो हुसनसिंह ने अपने साथी प्रितेश गुप्ता को फंसाने के लिए जाल बुना था। हुसनसिंह मुंबई में अपने साथी गणेश शर्मा के साथ होटल चलाता था। प्रितेश को फंसाने के लिए दोनों ने एक मजदूर को निशाना बनाया। उसे काम देने के बहाने ट्रेन से बुरहानपुर लाए। फिर कुंडी भंडारा रोड के पास खेत में शराब पिलाने के बाद गला दबाकर मार दिया और पेट्रोल डालकर जला दिया था। पुलिस को जेब से मिले दस्तावेजों से शव हुसनसिंह का लगा, लेकिन उसके परिवार ने शव पहचानने से इनकार कर दिया। डीएनए टेस्ट में भी उसका मिलान नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की, जिसके बाद मुंबई में होटल चलाने वाले उसके साथी गणेश तक पुलिस पहुंची और हत्या का खुलासा हुआ। पिछले डेढ़ साल से पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी। लालबाग पुलिस को आरोपी के आगरा में होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने वहां एटीएस की मदद लेकर आरोपी को पकड़ा और रविवार को बुरहानपुर लेकर पहुंचे। आरोपी पर 30 हजार रुपए का इनाम है। आरोपी पर पहले से गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में सात अपराध दर्ज है। डीएनए से हुई मृतक की पहचान… आरोपी की पहचान होने के बाद भी पुलिस के सामने शव की पहचान बड़ी चुनौती थी। इसके लिए पुलिस ने महाराष्ट्र में एक साल में गुमशुदा लोगों की जांच शुरू की। 21 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र के संभाजीनगर के मुंकदबाड़ी से कैलाश सावले की गुमशुदगी पर पुलिस को शंका हुई। इसके बाद पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया। मां और भाई के डीएनए से मृतक के डीएनए की जांच के बाद उनका मिलान हुआ। मृतक कैलाश सावले ही था।


