डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग:प्री-बजट बैठक में बोले डॉक्टर्स, कहा-प्राइवेट हॉस्पिटल के पैकेज की रेट बढ़ाए सरकार

भजनलाल सरकार फरवरी के दूसरे सप्ताह में अपना बजट पेश कर सकती है। इसे लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अलग-अलग सेक्टर के प्रतिनिधियों, प्रोफेशनल्स के साथ प्री बजट बैठक करके चर्चा कर रहे हैं। आज सीएम भजनलाल शर्मा ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों और जनजाति क्षेत्रीय विकास के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। चिकित्सा क्षेत्र की बैठक में डॉक्टर्स और उनसे जुड़े संगठनों ने प्रदेश में डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग रखी। बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुनील चुघ ने कहा कि डॉ. अर्चना शर्मा के सुसाइड के बाद प्रदेश में डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए एसओपी बनी थी। जिसका गजट नोटिफिकेशन होना चाहिए। जिससे वह कानून की तरह काम करे। वहीं प्रदेश में साल 2008 में राजस्थान मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बना था। उसे जल्द से जल्द पास करवाया जाना चाहिए। सरकारी स्कीम के पैकेज की रेट व्यवहारिक हो
बैठक में आईएमए राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. एमपी शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश में मेडिकल के क्षेत्र में सरकार की योजनाएं बहुत अच्छी हैं। इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए निजी हॉस्पिटल सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। लेकिन हमारी सरकार से मांग है कि इन सरकारी योजनाओं में निजी अस्पतालों के लिए जो पैकेज फिक्स है। उनकी रेट को व्यवहारिक किया जाए। जिससे निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं के तहत मरीज का मुफ्त इलाज भी कर सकें। वहीं वे स्वयं भी सर्वाइव कर सकें। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश की 60 से 70 प्रतिशत जनता छोटे निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाती है। लेकिन सरकारी योजनाओं के पैकेज की रेट व्यवहारिक नहीं होने से इन अस्पतालों के लिए इन योजनाओं को चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बैठक में मांग रखते हुए कहा कि पैकेज की रेट रिवाइज करने वाली कमेटी में आईएमए के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिए। आदिवासी समाज का उत्थान प्राथमिकता
वहीं जनजाति क्षेत्रीय विकास के प्रतिनिधियों के साथ प्री बजट बैठक में सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के समग्र उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने आदिवासी समाज के विकास के लिए अहम निर्णय लिए हैं, जिससे समाज को मूलभूत जरूरतों से लेकर उन्नति के अवसर तक हर कदम पर मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी वर्गों एवं उनके लिए कार्य करने वाली संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समावेशी बजट तैयार किया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि जनजाति क्षेत्र के विकास व उत्थान से संबंधित विषयों पर मिले सुझावों का उचित परीक्षण कर आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आगामी बजट में जनजाति क्षेत्रों के विकास को और गति दी जा सके।

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