भास्कर न्यूज | अमृतसर देश के 13वें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन का का जन्म भले ही पाकिस्तान में हुआ था लेकिन उनकी जिंदगी का काफी हिस्सा गुरु नगरी में बीता। दिल्ली में शिफ्ट होने के बाद भी उनका अपने गृह नगर में आना जाना रहा। समय-समय पर होने वाले बड़े समागमों में अक्सर लोग उनको बुलाना चाहते थे और वह समय होने पर जरूर आते थे। ऐसे ही एक आयोजन में डॉक्टर साहब साल 2002 बतौर पीएम पधारे थे। उस दौरान का वाकया शहर के सीनियर सिटीजन नरेश जौहर आज भी याद रखते हैं। वह कहते हैं कि उनसे हुई मुलाकात उनको ताउम्र याद है और आगे भी रहेगी। इसका मुख्य कारण है डॉ. साहब की सहजता और शालीनता भरे शब्द। यह वह शब्द हैं जो उन्होंने जौहर द्वारा तैयार एक पुस्तिका बारे कही थी। जौहर बताते हैं कि डीएवी कॉलेज हाथी गेट का दीक्षांत समारोह था और प्रबंधन की अपील स्वीकार पीएम डॉ. मनमोहन सिंह आए हुए थे। उस दौरान जौहर ने अमृतसर पर आधारित एक बुकलेट-“अमृतसर प्राइड अॉफ इंडिया” गाइड बुक तैयार की थी। वह बताते हैं कि बुकलेट को वह डॉक्टर साहब को देना चाहते थे लेकिन यह संभव नहीं था। लेकिन हिम्मत जुटा कर वह समागम शुरू होने से पहले कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल एमएल ऐरी से मिले और अपनी इच्छा जताई। जौहर कहते हैं कि बड़े अनुनय-विनय के बाद ऐरी ने उनको सुझाव दिया कि जब वह लंच करेंगे तो उस दौरान बुकलेट देने की कोशिश करो। खाना खाने से पहले जौहर बुकलेट लेकर वहां पहुंच गए। इसके बाद डॉक्टर साहब खाने की टेबल पर बैठ गए। उनके साथ मौजूद ऐरी ने इशारा किया तो वह डरते-डरते वहां पहुंच गए और बुकलेट पीएम की तरफ बढ़ा दी।


