टोंक में जनसरोकार मंच की ओर से आयोजित विशेष समारोह में रविवार को वरिष्ठ कवि एवं आलोचक डॉ. मनु शर्मा के 3 काव्य संग्रह जीवनचक्र, जामताड़ा डॉट कॉम और झुकने की भी कोई हद है, का विमोचन हुआ।
यह आयोजन अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, कृषि मंडी के सामने हुआ। इसमें शहर के साहित्य प्रेमी, लेखक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, कवि, पत्रकार और कला व संस्कृति से जुड़े प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। जिन्होंने मोबाइल के दुष्प्रभाव व संवेदनशीलता में आ रही कमी पर मंथन कर डॉ. मनु शर्मा के काव्य संग्रह को सारगर्भित बताते हुए सामाजिक ताने-बाने की मजबूती के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने डॉ. शर्मा की कविताओं की सामाजिक यथार्थ, समकालीन चुनौतियों और मानवीय संवेदनाओं पर गहरी अभिव्यक्ति की सराहना की। विमोचित काव्य संग्रहों में आधुनिक समय के जटिल विषयों को प्रभावी भाषा और विचारशील दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद गर्ग ने कहा कि डॉ. मनु शर्मा की कविताएं केवल भावनाओं का चित्रण नहीं करतीं, बल्कि समाज को नया दृष्टिकोण भी देती हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को आत्म विश्लेषण और सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करती हैं। विद्वानों ने विचार साझा किए
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अशोक सक्सेना ने कहा कि यह लोकार्पण समारोह केवल साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि समकालीन कविता और आलोचना को समझने का अनूठा अवसर है। इस मौके पर साहित्यकारों और वक्ताओं ने कविता, समाज और समकालीन साहित्य पर अपने विचार साझा किए। डॉ. मनु शर्मा की रचनाओं के विविध पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य उमा हाड़ा ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर नामा, प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद गर्ग, रामावतार गुप्ता, विनोद पदरज, रमेश वर्मा, अशोक सक्सेना, देवेंद्र जोशी, सलीमुद्दीन खान, मिर्जा नसीम बैग, लल्लूलाल शर्मा, मुजीब आजाद, कवि प्रदीप पंवार, अरशद अब्दुल हामिद, बृजराज स्नेही, केदार शर्मा निरीह, हरिराम चौधरी, ममता जाट, रामरतन गुगलिया, राजकुमार रजक, प्रशांत, शिप्रा सक्सेना, प्रिया सक्सेना, प्रकाशचंद जैन, हरभजन, दयाशंकर शर्मा, एम असलम, विनोद शर्मा, मनोज तिवारी, मोहित वैष्णव, चितरंजन नामा, अमन तसेरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंच का संचालन उमा हाड़ा ने किया। इनपुट: एम असलम।


