पृथ्वी पर जिस तरह से पर्यावरणीय समस्याओं से आज विश्व जूझ रहा है उसका हल परम्परागत भारतीय ज्ञान में रचा बसा है, जरूरत है तो बस आधुनिक शिक्षा के आकर्षण में बंधी युवा पीढ़ी को भारतीय विद्या से जोड़ना होगा, उसकी वैज्ञानिकता और क्षमताओं से परिचित करवाना होगा , तभी वर्तमान पीढ़ी का भविष्य सुखमय बन पाएगा। यह बात मंगलवार को तरूण भारत संघ के स्वर्ण जयंती वर्ष पर जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय, तरूण भारत संघ, कीवा के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति सचिवालय के सभागार में तीसरे दो दिवसीय विश्व जल सम्मेलन में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् व मैगसेसे पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र सिंह ने वक्ता के रूप में व्यक्त किए। डॉ. सिंह ने जलीय और पर्यावरणीय समस्याओं पर बोलते हुए कहा कि परम्परागत ज्ञान को अपनाने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य यदि सकारात्मक रूप से पूर्ण करवाया जाए तो हम काफी हद तक पर्यावरण और जल से जुड़ी समस्याओं से निजात पा सकते है। जल, पर्यावरणीय और जैव विविधता संबंधी विकट स्थितियों से निपटने को लेकर आयोजित विश्व जल सम्मेलन में अध्यक्षीय उद्बोधन में विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने परम्परागत भारतीय ज्ञान में पंच महाभूतों का ऐसा समावेश है, पर्यावरण संबंधी हर प्रकार की समस्या का सामाधान उसमें समाहित है। पंचमहाभूतों को संतुलित करके प्रकृति में संतुलन बनाया जा सकता है। अनंत राष्ट्रीय विश्वविद्यालय अहमदाबाद के कुलपति प्रो. अनुनय चौबे ने कहा कि शहरीकरण और विकास की दौड़ में पर्यावरणीय असंवेदनशीलता को देखा जा सकता है। पर्यावरणीय समस्याएं जो आज हमारे सामने आ रही है उसके लिए युवाओं को विषय और कक्षाओं की परिधि से बाहर लाकर समुदाय से जोड़ना होगा। सिंघानिया विवि के कुलपति प्रो. पृथ्वी यादव ने इंदौर और उदयपुर के उदाहरण के माध्यम से सामुदायिक सहयोग से प्रकृति की सेवा की बात कही। मेक्सिको से आए हेलमुट केंजलमेन ने कहा कि समय के साथ प्रकृति को जो दोहन हुआ है। उसको सामुदायिक सहयोग से अपने विद्यार्थियों को सामुदायिक सहयोग के कौशल से युक्त बनाना होगा जो भविष्य में हमसे बेहतर बने और पर्यावरण को संजोए रख सके। विश्व को रहने की बेहतरीन जगह बना सके। अमेरिका से आए हेरीबेरिटो वेलिसेनियर ने पृथ्वी के अस्तिव को बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग, परंपरागत ज्ञान,बच्चों के साथ संवाद की बात कही। उन्होंने बताया कि हमें हमारे ज्ञान को अपने बच्चों के साथ साझा करना होगा। संयोजक डॉ. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यापीठ की मेजबानी में विश्व जल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस विश्व जल सम्मेलन में अफ्रीका , अमरीका, नोर्थ अमेरिका, ऐशिया, युरोप, आस्ट्रेलिया के 19 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग ले रहे है। जिसमें मुख्य रूप से उन देशों के प्रतिनिधी शामिल है जिन देशों में पिछले दो सालों में बाढ़ और सूखे के कारण विनाश हुआ है। विश्व जल सम्मेलन में विवि के रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, प्रो सरोज गर्ग, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. अनिल मेहता, डा. पंकज रावल , डा. पीके सिंह, डॉ. पुनीत कुमार, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. आईजे माथुर, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. रमन सूद, डॉ. नीरू राठौड़, मांजल सारंगदेवोत सहित शहर में पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले पर्यावरणविद् और गणमान्य लोग उपस्थित थे।


