भास्कर न्यूज | जालंधर ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है। ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। ड्राइविंग टेस्ट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान केवल एक महिला कर्मचारी से दो काउंटरों पर दस्तावेज स्क्रूटनी और फोटो वेरिफिकेशन का काम करवाया जा रहा है, जबकि यहां 3 से 4 कर्मचारियों की आवश्यकता है। कर्मचारियों की कमी और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के चलते सैकड़ों आवेदकों को घंटों लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ा। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी के लिए एक ही लाइन रखी गई है। इस मामले में आरटीओ अमनपाल सिंह ने कहा कि ट्रैक पर व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कर्मचारियों की मांग हेड ऑफिस के समक्ष रखी गई है। ट्रैक पर कार्य करवाने पहुंचे आवेदकों ने बताया कि सुबह से ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। वे स्वयं सुबह 9 बजे से ट्रैक पर मौजूद थे। अधिकांश आवेदक सरकारी फीस पहले ही ऑनलाइन जमा करवा चुके होते हैं और अपॉइंटमेंट लेकर टेस्ट देने पहुंचते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। ट्रैक के अंदर केवल एक ही महिला कर्मचारी तैनात है, जिसे सभी प्रकार के अलग-अलग कार्य करने होते हैं। कार्य की गति इतनी धीमी रही कि कई लोग दो से तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहे। मौके पर न तो कोई वैकल्पिक कर्मचारी तैनात किया गया और न ही कोई वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्था संभालता नजर आया। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर बैठने की व्यवस्था बेहद खराब है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ आवेदकों ने थकान और चक्कर आने की शिकायत भी की। लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता सीधे तौर पर जनता की सेहत और समय से खिलवाड़ है। लोगों ने स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से मांग की है कि ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर कर्मचारियों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए, कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया जाए और लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।


