ढाई साल में 3.65 लाख युवा को स्किल ट्रेनिंग, 462 करोड़ खर्च, नौकरी सिर्फ 13% को, 87 फीसदी ‘हुनरमंद’ राजस्थानी कतार में

प्रदेश सरकार स्कूल-कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) शिक्षा लागू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन स्किल डवलपमेंट पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी छात्र रोजगार को तरस रहे हैं। सरकार का राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम हर साल चयनित छात्रों को स्किल डवलपमेंट कोर्स करवाता है। पिछले ढाई साल में 3 लाख 65,489 युवाओं को स्किल के कोर्स करवाए। इनमें से 13% यानी 48,629 को ही रोजगार मिला और 87% ‘हुनरमंद’ रोजगार का इंतजार कर रहे हैं। इसमें भी चौंकाने वाली बात यह है कि कई योजनाओं में प्लेसमेंट का प्रोविजन ही नहीं है और जिनमें 50% से ज्यादा रोजगार दिलाने का प्रोविजन है, उनमें प्लेसमेंट ना के बराबर हो रहे हैं। 7 योजनाएं, 30 कोर्स; आरएसएलडीसी 7 योजनाएं संचालित करता है। इनमें 30 से ज्यादा स्किल डवलपमेंट कोर्स शामिल हैं। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना केंद्र सरकार के सहयोग चलती है। चार योजनाएं स्टेट फंडेड और 2 अन्य विभाग की हैं। हर साल 400-450 सेंटर्स पर कोर्स कराए जाते हैं। इनकी फीस अलग-अलग होती है। एजेंसियों को पेमेंट तभी, जब प्लेसमेंट होगा जिन युवाओं को नौकरी नहीं मिली, उनमें वे भी शामिल हैं, जिन्हें सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन प्लेसमेंट का प्रोविजन नहीं था। जिन योजनाओं में कोर्स कराने के बाद 50% से ज्यादा युवाओं को प्लेसमेंट अनिवार्य है, उनमें एजेंसी को पेमेंट तभी किया जाएगा जब प्लेसमेंट का लक्ष्य पूरा होगा, इस पर विभाग काम कर रहा है।- ऋषभ मंडल, कमिश्नर, कौशल, रोजगार व उद्यमिता विभाग

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