बिग कंट्रोवर्सी:बालोद जिले में होने वाले राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के आयोजन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में होने वाले जंबूरी के आयोजन ने राजनीतिक रूप ले लिया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा इस आयोजन को निरस्त किए जाने की खबर के बाद स्काउट गाइड ने इसे जारी रखने की घोषणा कर दी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यह पूरा आयोजन भारत स्काउट गाइड दिल्ली का है और इसमें सभी काम जेम पोर्टल से हो रहे हैं। जबकि बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आयोजन राज्य का है और बिना टेंडर के काम हुआ, इस पर कोई बात नहीं हो रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाए कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया। इधर, कांग्रेस नेताओं ने बताया कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का भ्रष्टाचार का पुराना नाता है। स्काउट एंड गाइड ने राज्य कार्यालय के लिए 22 एवं 24 जनवरी 2019 को जमीन खरीदने के लिए दो रजिस्ट्री करवाई। ये दोनों रजिस्ट्री भारत स्काउट एंड गाइड के नाम पर है। दस्तावेजों के मुताबिक दोनों ज़मीनें राजेश अग्रवाल पिता ओमप्रकाश अग्रवाल से खरीदी गई। राजेश अग्रवाल भारत स्काउट एंड गाइड के छत्तीसगढ़ के तत्कालीन कोषाध्यक्ष थे। ये ज़मीनें 56 लाख 93 हजार और 13 लाख 7 हजार रुपए यानी कुल 70 लाख रुपए में खरीदी गई। यानी कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने अभनपुर स्थित ज़मीन के मालिक राजेश अग्रवाल को 70 लाख रुपयों का भुगतान किया। इसके चेक पर तत्कालीन अध्यक्ष गजेंद्र यादव ने दस्तखत किए। जिम्मेदारी हमारे विभाग की: यादव
यादव ने कहा कि इस आयोजन में देश और विदेश के 18 हजार से ज्यादा बच्चे आएंगे। बच्चे स्कूल शिक्षा विभाग के रहते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि बच्चे आ रहे हैं समुचित व्यवस्था हो। यादव ने कहा कि कार्यक्रम का अध्यक्ष राष्ट्रीय स्काउट गाइड तय करेगा वैसे राष्ट्रीय आयोजन है तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ही रहेंगे। यह उनका ही काम है। यादव ने कहा कि बृजमोहन जी ने क्या सवाल खड़े किए हैं यह मेरी जानकारी में नहीं है। मैं उनसे मिलकर व्यक्तिगत बात करूंगा। शिक्षा विभाग, स्काउट गाइड का आयोजन सांसद बृजमोहन ने कहा कि उन्होंने अनियमितता के संबंध में भारत स्काउट एंड गाइड के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जैन से बात की तो उन्होंने कहा कि इसमें उनका कोई इंटरेस्ट नहीं है। यह छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट एंड गाइड और शिक्षा विभाग का मामला है। बृजमोहन ने एक दिन पहले ही इस आयोजन को स्थगित करने का निर्णय लिया था। कार्यक्रम का स्थल नवा रायपुर से बदलकर बालोद कर दिया गया। वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत 10 करोड़ के बजट को सीधे जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में स्थानांतरित किया गया, जो संस्था की स्वायत्तता और वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस का आरोप: गड़बड़ी करने बदल दी टेंडर की शर्तें प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल व कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने पत्रकार वार्ता में दस्तावेजों के साथ खुलासा करते हुए कहा कि जंबूरी के लिए दो टेंडर हुए। पहला 20 दिसंबर को रद्द हुआ और 3 जनवरी को खुलने वाले टेंडर में भरी असमानता है। पुराने टेंडर में 3 साल का अनुभव जरूरी था लेकिन नए टेंडर में सिर्फ 1 साल मांगा गया। पुराने टेंडर में 3 माह की बैंक गारंटी को 1 माह कर दिया गया। 5 करोड़ का टर्न ओवर को घटाकर 3 करोड़ किया गया। स्काउट गाइड का छत्तीसगढ़ अध्यक्ष कौन इसे लेकर बड़ा विवाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 13 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ का राज्य अध्यक्ष मनोनीत किया। यह आदेश ही विवाद की सबसे प्रमुख वजह है। क्योंकि इससे पहले बृजमोहन अग्रवाल जब शिक्षा मंत्री थे तब उन्हें स्काउट्स एवं गाइड्स का पदेन राज्य अध्यक्ष बनाया गया था। छत्तीसगढ़ भारत स्काउट एवं गाइड्स के उपनियम 17 (1) के प्रथम पैराग्राप में यह स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य परिषद द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद एक बार जिसको मनोनीत अध्यक्ष बना दिया जाता है उसको 5 साल के लिए पदेन अध्यक्ष माना जाता है। ऐसी स्थिति में रुल बुक III 64.2 के मुताबिक बृजमोहन अग्रवाल इस समय स्काउट्स गाइड्स के पदेन अध्यक्ष हैं। ऐसी स्थिति में 13 दिसंबर 2025 का आदेश तभी मान्य हो सकता है जब बृजमोहन अग्रवाल अपने पद से इस्तीफा दे दें। आज की स्थिति में बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से उनकी सहमति के बिना गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष घोषित कर दिया है।

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