CGPSC घोटाला:सीबीआई का दावा- प्री में पास होने पर मेंस के पर्चे के लिए उत्कर्ष ने अभ्यर्थियों से वसूले 1.3 करोड़ रुपए

सीबीआई ने हाल ही में सीजीपीएससी 2021- 22 में भर्ती घोटाले से जुड़ी अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी। इसमें बताया गया है कि कैसे अफसरों और नेताओं ने साठगांठ करके अपने बच्चे और रिश्तेदारों का बड़े पदों पर चयन कराया है। जिन 29 अभ्यर्थियों को प्री और मेन्स का पेपर मिला, उनका चयन कब और कैसे हुआ, कैसे अभ्यर्थियों को पैसों के बूते पेपर मिले, कैसे पैसे का बंदरबांट किया गया, वह सब कुछ है। भास्कर के पास सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट और एक सरकारी गवाह के बयान की कॉपी है। इसके मुताबिक प्री में पास होने पर मेंस के पर्चे के लिए उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से वसूले 1.3 करोड़ रुपए वसूले थे। सीबीआई के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार ने अधिसूचना दिनांक 16 फरवरी 2024 और 10 अप्रैल 2024 के माध्यम से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच सौंपी थी। आरोप है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी और तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए वर्ष 2020 से 2022 के दौरान अपने पुत्रों, बेटियों और रिश्तेदारों का चयन सुनिश्चित किया। जांच में पता चला की सीजीपीएससी 2021 की प्रारंभिक परीक्षा दिनांक 13.02.2022 को छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की गई थी। गवाह ने बताया- उत्कर्ष ने प्री पास कराने में मदद की थी, इससे उस पर भरोसा बढ़ा एक सरकारी गवाह वी.चंद्राकर ने कोर्ट को दिए बयान में बताया कि मेरी छोटी बहन भी सीजीपीएससी की तैयारी कर रही थी। 2021-22 में परीक्षा में उसे पास कराने रिश्तेदार ने फोन किया था कि पास होने का जुगाड़ हो गया है। रायपुर में परिचित की कुछ अधिकारी और नेताओं तक पहुंच है। तब हम मिलने रायपुर स्थित उनके पेट्रोल पंप (बोरियाकला) में गए। उसके साथ उत्कर्ष चन्द्राकर भी था। उत्कर्ष ने बताया कि उसके मौसा केके चन्द्रवंशी अभी सीएम के ओएसडी हैं। साथ में चेतन बोघरिया भी वहीं ओएसडी है। दोनों टामन सोनवानी को जानते हैं। सोनवानी पहले सीएम हाउस में थे। वर्तमान में लोक सेवा आयोग के चेयरमैन हैं। परीक्षा पास करवाने 50 से 60 लाख का खर्च बताया गया। खर्च ज्यादा होने से मैंने मना कर दिया। बाद में फिर उनका कॉल आया, कहा कि अगर आप कुछ और आवेदकों को ले आओगे तो तुम्हारा काम फ्री में हो जाएगा। इस पर मैंने रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येन्द्र सिंह ठाकुर, पुल्कित साहू और भारती वर्मा को मनाया। सभी लोगों से पैसा जुटाकर उत्कर्ष को दे दिए। परीक्षा से पहले फोन आया कि बच्चों को डीडी नगर स्थित सिद्धी विनायक पैलेस भेजना है। तब सब को भेज दिया। उत्कर्ष उन्हें हॉल में ले गया। उसने प्री की प्रिंटेड कॉपी बच्चों को दे दी। प्री रिजल्ट में सभी का चयन हो गया था। सब को भरोसा हो गया कि उत्कर्ष यह काम करवा देगा। गवाह के मुताबिक- उत्कर्ष ने मेंस पास कराने के लिए पैसे मांगे थे। इस पर पैसा इकठ्ठा करवाकर उसे दिए। मेन्स एग्जाम के 15 दिन पहले उत्कर्ष ने बार नवापारा में लॉज बुक कराया था, बस बुक करवाई थी। इस बस में रितेश समेत उक्त 8 लोगों के अलावा अन्य लोगों को साथ ले जाया गया। उत्कर्ष अपनी गाड़ी से और मैं अपनी गाड़ी से गया। बाद में और पैसे मांगे गए,नहीं दिए तो सभी बच्चे फेल हो गए।

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