भास्कर न्यूज | राजनांदगांव जैन बगीचे के नए हॉल में जारी प्रवचन में शुक्रवार को मुनि विनय कुशल श्रीजी के शिष्य मुनि वीरभद्र (विराग) श्रीजी ने कहा कि हमारे जीवन में जो तकलीफ है वह पूर्व जन्म में हमने धर्म नहीं किया इसकी वजह से है। तकलीफ आने पर नवकार मंत्र का जाप करो तो तकलीफ को आसानी से पार कर जाओगे। मुनि वीरभद्र ने कल्पसूत्र का वाचन किया। कहा कि कल्पसूत्र में साधुओं के आचार के बारे में बताया गया है। इसमें बताया गया कि साधुओं को अल्प मूल्य का श्वेत वस्त्र धारण करना चाहिए। जिस साधु को दृश्य कर (ध्यान में रखकर) भोजन बनाया गया है, उसे साधु द्वारा ग्रहण नहीं करना चाहिए। बिना किसी ध्यान के सामान्य तरीके से कोई भोजन बना हो तो उसे ग्रहण करना चाहिए। जहां ठहरे हैं वहां की 12 तरह की चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। जहां साधु ठहरा है वहां उसके द्वारा किए गए तप का छठवां हिस्सा उस व्यक्ति को भी मिलता है। कहा कि कल्पसूत्र में वंदन, महाव्रत के बारे में भी बताया गया है। कहा कि प्रथम और अंतिम क्रम के साधुओं को पांच प्रतिक्रमण अवश्य करना चाहिए। बीच के साधुओं के लिए दो प्रतिक्रमण आवश्यक है। प्रथम व अंतिम क्रम के साधु किसी गांव में 1 माह रुके और उन्हें यदि किसी कारणवश और रुकना हो तो वे स्थान बदल दें। बीच के साधु 1 वर्ष तक रह सकते हैं। कहा कि इस जीवन में जड़ता आ गई है इसे दूर करें। मुनि श्रीजी ने कहा कि सुपात्र दान का ज्यादा लाभ संयुक्त परिवार को मिलता है। पर्यूषण पर्व सर्वोत्तम है। कल्पसूत्र जिसने सुना उसे इसका लाभ अवश्य मिलता है।


