श्री पटना साहिब कमेटी की ओर से दो तख्तों के जत्थेदारों को ‘तनखाहिया’ घोषित किए जाने के बाद बढ़े टकराव के बीच, जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज को हटाने की मांग तेज हो गई है। पंथक सूत्रों के अनुसार, उनकी जगह भाई बलवंत सिंह राजोआणा को श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार नियुक्त किया जा सकता है। भाई राजोआणा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में फांसी की सजा के तहत पटियाला जेल में बंद हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने तख्त श्री पटना साहिब की प्रबंधक कमेटी को तलब किया था। इसके जवाब में 21 मई को तख्त श्री पटना साहिब के पांच प्यारों ने तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार टेक सिंह धनौला और जत्थेदार गड़गज्ज को ‘तनखाहिया’ घोषित कर दिया। साथ ही शिअद (बादल) के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को 10 दिन के भीतर श्री पटना साहिब पहुंचकर सफाई देने का हुक्म जारी किया गया। पूरे घटनाक्रम का अकाली दल के हाईकमान ने गंभीर संज्ञान लिया है। सूत्रों के मुताबिक, श्री अकाल तख्त के जत्थेदार गड़गज्ज की कार्रवाई से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता असहज हैं। यही कारण है कि जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज को जल्द ही केवल केसगढ़ साहिब की जत्थेदारी तक सीमित किया जा सकता है। सिख अजायब घर में डॉ. मनमोहन सिंह की तस्वीर पर विवाद… भाई बलवंत सिंह राजोआणा ने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी को पत्र लिखकर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की तस्वीर सिख अजायब घर में न लगाने की मांग की है। इस पर प्रधान धामी ने आज कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में इस पर पुनर्विचार किया जाएगा और तब ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज के फैसलों का दमदमी टकसाल ने किया कड़ा विरोध दमदमी टकसाल के प्रमुख भाई हरनाम सिंह खालसा ने कहा है कि सिख संगत तो गड़गज्ज को जत्थेदार नहीं मानती। इनके फैसले लागू हो या न हों, सिख कौम को क्या फर्क पड़ता है। पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को जत्थेदार के पद से हटाकर जत्थेदार गड़गज्ज की सिंह साहिबान के तौर पर ताजपोशी करना ही अनुचित था। इसी तरह, दमदमी टकसाल अजनाला के प्रमुख सेवादार भाई अमरीक सिंह ने कहा कि जत्थेदार गड़गज्ज तो शिअद प्रधान सुखबीर बादल के लिफाफे से निकाले गए जत्थेदार हैं, उन्हें दमदमी टकसाल जत्थेदार कतई स्वीकार नहीं करेगा। सिख इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी जत्थेदार की नियुक्ति रात के अंधेरे में चुपचाप की गई हो। दमदमी टकसाल के प्रमुख ज्ञानी राम सिंह ने कहा है कि जत्थेदार गड़गज्ज का फैसला ही दुखदायी व निंदनीय है। हालांकि तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार भाई बलदेव सिंह द्वारा भी पलटवार करते हुए दिए गए फैसलों को भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन जत्थेदार गड़गज्ज को राजनीति से प्रेरित ऐसा फैसला करने की पहल करनी ही नहीं चाहिए थी। दोनों तख्तों के इन फैसलों के चलते सिख कौम धड़ों में विभाजित हो गई है। ऐसा नहीं होना चाहिए था।


