तवा जलाशय को मिला रामसर साइड सर्टिफिकेट:वर्ल्ड वेटलैंड्स डे पर भोपाल में आयोजित हुआ कार्यक्रम, 1978 में हुआ था निर्माण

नर्मदापुरम जिले के तवा जलाशय को रामसर साइड का दर्जा मिला। रविवार को वर्ल्ड वेटलैंड्स डे के अवसर पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में रामसर साइड्स प्रभारी एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर पूजा नागले, सोहागपुर के सहायक संचालक अंकित जामोद, मढ़ई रेंजर पीएन ठाकुर ने रामसर साइड का सर्टिफिकेट दिया। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया तवा जलाशय को रामसर साइड का टैग मिलने के बाद आज रविवार को सर्टिफिकेट मिला है। तवा जलाशय का काफी हिस्सा एसटीआर वन क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में काफी नियम में बदलाव होगा। गौरतलब है कि 14 अगस्त 2024 को मप्र के तवा जलाशय, तमिलनाडु के नंजरायन पक्षी अभयारण्य, काजुवेली पक्षी अभयारण्यको भारत के रामसर स्थलों की सूची में जोड़ा गया था। रामसर सूची में शामिल किए जाने पर पर्यावरण मंत्री और मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुशी जाहिर की थी। क्या है रामसर साइट और कन्वेंशन रामसर साइट विश्व के अलग-अलग हिस्सों में फैले वेटलैंड हैं। 1971 में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए दुनिया भर के वेटलैंड को संरक्षित करने की दिशा में यूनेस्को की ओर से एक कन्वेंशन हुआ था। यह कन्वेंशन ईरान के रामसर में हुआ था। यहां अंतर्राष्ट्रीय वेटलैंड ट्रिटी पर कई देशों ने हस्ताक्षर किए थे। तब से विश्व के अलग-अलग देशों में जैव विविधता से परिपूर्ण वेटलैंडों की पहचान कर इसे रामसर साइट का टैग देकर इसे संरक्षित किया जाता है। रामसर साइट का टैग मिलने के फायदे रामसर साइट का टैग मिलने से उस वैटलैंड पर पूरी निगरानी रखी जाती है। उसे पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए तैयार किया जाता है। रामसर साइट घोषित होने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि यहां कितने तरह के पक्षियों की प्रजातियां पोषित हो रही है और यहां का इकोसिस्टम क्या है। इसके बाद एक तय वैश्विक मानक के तहत इसे संरक्षित किया जाता है। ऐसी जगहों पर वैसे निर्माण और अन्य गतिविधियों को रोक दिया जाता है, जिससे वेटलैंड की जैव विविधता प्रभावित होती हो। अब जानिए तवा जलाशय के बारे में तवा जलाशय का निर्माण तवा और देनवा नदियों के संगम पर साल 1978 में किया गया है। मालानी, सोनभद्र और नागद्वारी नदी तवा जलाशय की प्रमुख सहायक नदियां हैं। तवा नदी, बाएं किनारे की एक सहायक नदी है जो छिंदवाड़ा जिले में महादेव पहाड़ियों से निकलती है, बैतूल जिले से होकर बहती है और नर्मदापुरम जिले में नर्मदा नदी में मिल जाती है। यह नर्मदा नदी की सबसे लंबी सहायक नदी (172 किलोमीटर) है। तवा जलाशय इटारसी शहर के पास स्थित है।. जलाशय का निर्माण सिंचाई के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि बाद में इसका उपयोग बिजली उत्पादन और कृषि के लिए भी किया जाने लगा है। तवा जलाशय का कुल डूब क्षेत्र 20,050 हेक्टेयर है। जलाशय का कुल जलग्रहण क्षेत्र 598,290 हेक्टेयर है। तवा जलाशय वन विभाग, जिला नर्मदापुरम के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है। जलाशय सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित है और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और बोरी वन्यजीव अभयारण्य की पश्चिमी सीमा बनाता है। जलाशय जलीय वनस्पतियों और जीवों विशेषकर पक्षियों और जंगली जानवरों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां पौधों, सरीसृपों और कीड़ों की कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। यह कई स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है। यह मध्य प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है।

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