अब जिम्मेदार बताने को तैयार नहीं किसने बुलाया था और क्यों निरस्त कर दिया ग्वालियर में 15 दिसंबर को होने वाले तानसेन समारोह को लेकर नया विवाद सामने आया है। समारोह का यह शताब्दी वर्ष है, इसी के मद्देनजर पूर्व में तानसेन अवॉर्ड से सम्मानित करीब 11 शीर्षस्थ कलाकारों को पांच दिन पहले आमंत्रित किया गया। उनके आने-जाने के टिकट आदि की व्यवस्था के लिए उनसे पूरा यात्रा कार्यक्रम मांगा गया। संगीत सम्राट तानसेन के प्रति सम्मान और शताब्दी वर्ष के आयोजन की गरिमा को देखते हुए कुछ कलाकारों ने ऐनवक्त पर बुलाए जाने के बावजूद अपने बाकी कार्यक्रमों में फेरबदल कर तानसेन समारोह में आने की सहमति भी प्रदान कर दी। इसके बाद अफसरों ने कलाकारों के फोन उठाना बंद कर दिए। फिर अचानक गुरुवार रात उन्हें कार्यक्रम निरस्त करने की सूचना दे दी गई। तर्क दिया कि 11 कलाकारों को आमंत्रित किया था, लेकिन उनमें से पांच-छह ही आ पा रहे हैं, इसलिए अब कार्यक्रम से यह हिस्सा हटा दिया है। इससे कलाकार बेहद नाराज हैं, लेकिन मप्र का संस्कृति संचालनालय अनभिज्ञता जता रहा है, उनका दावा है कि उनकी ओर से ऐसा कोई संवाद ही नहीं हुआ। संस्कृति संचालक एनपी नामदेव से भी इस बारे में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। आमंत्रित करने वाले मिश्रा पर सवाल, इन्होंने ही फोन लगाए
शीर्षस्थ कलाकारों को आमंत्रित करने वाले संजय मिश्रा पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनका संचालनालय से सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं है। ये उज्जैन संगीत महाविद्यालय में पदस्थ हैं। इन्होंने ही सभी कलाकारों को फोन पर आमंत्रित किया था। बाद में उनके फोन उठाना बंद कर दिए। यह कलाकारों का अपमान है
संस्कृति विभाग की ओर से संजय मिश्रा ने हमसे बात की थी। एलके पंडित, डालचंद शर्मा, सतीश व्यास जैसे बड़े कलाकारों को आमंत्रित किया था। हमने लिखित सूचना मांगी तो कहा कि फ्लाइट के टिकट के साथ जानकारी भेज दी जाएगी। हमने अपने शेड्यूल बदल दिए। गुरुवार देर रात कहा कि कार्यक्रम निरस्त कर रहे हैं। यह तानसेन अवॉर्डी का अपमान है।
-पं. विद्याधर व्यास, ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायक, 2019 में तानसेन अवॉर्ड से सम्मानित बहुत ही ठेस पहुंचाने वाला हमें पांच-छह दिन पहले 15 दिसंबर के लिए आमंत्रित किया था। तानसेन के प्रति आदर और समारोह के शताब्दी वर्ष को देखते हुए मैंने स्वीकृति दी थी। बाकी कार्यक्रम निरस्त कर दिए। एेनवक्त पर मना कर दिया, जो बहुत ही ठेस पहुंचाने वाला है। – पं. सतीश व्यास, संतूर वादक, 2020 में तानसेन अवॉर्ड से सम्मानित


