डीग में तालाबों में गंदे पानी और मछलियों के मरने के विरोध में पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में धरना 16वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी धरने को अपना समर्थन दिया। धरने पर बैठे गिरीश शर्मा ने बताया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे भूख हड़ताल और आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर डाली। प्रदर्शनकारी तालाबों में गंदे पानी की निकासी और घाटों की सफाई की मांग कर रहे हैं। शर्मा ने बताया कि डीग जिले के लगभग 30,000 घरों का गटर और शौचालय का पानी सीधे तालाबों में आता है। इससे तालाबों का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। मलमास के महीने में जब 84 कोस परिक्रमा होती है, तो लाखों श्रद्धालु इसी बदबूदार पानी में स्नान करते हैं और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। जल महल देखने आने वाले हजारों पर्यटक भी इस दूषित जल को देखकर निराश होते हैं। सफाई के मुद्दे पर तीनों संबंधित विभाग—पुरातत्व विभाग, सिंचाई विभाग और नगर परिषद—एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं। कोई भी विभाग तालाबों की सफाई की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, जिसके कारण मछलियां मर रही हैं और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। गिरीश शर्मा ने आरोप लगाया कि पुरातत्व विभाग कहता है कि तालाबों से उनका कोई संबंध नहीं, जबकि 100 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य होने पर वे तुरंत रुकवाने पहुंच जाते हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग पर ‘डीग स्केप’ के नाम पर करोड़ों रुपये का टेंडर निकालने और पैसे का कहीं भी उपयोग न करने का आरोप लगाया। इस मामले की जांच की मांग की गई है। नगर परिषद ने दोनों तालाबों को उन्हें सौंपने पर ‘सेल्फी पॉइंट’ बनाने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक तालाबों में गटर का पानी आना बंद नहीं होता और घाटों की सफाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। धरने में कमलेश, शंकुतला, सरोज, रजनी, देवी, गीता, त्रिवेणी और राजरानी सहित कई महिलाएं और स्थानीय लोग मौजूद थे।


