ताश खेलते मास्टर जी, बकरियां चराते बच्चे:2000 फीट के पहाड़ पर बसा गांव, मवेशियों के जोहड़ से पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

गांव: राह का माला (रेकामाला)
जिला: अलवर
जिला मुख्यालय से दूरी: 38 KM 2000 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसे इस गांव में सिर्फ 2 घंटे की सोलर लाइट जलती है। पूरी रात घुप अंधेरे में डर के साए में गुजरती है। गुर्राहट की आवाज सुन लेते हैं तो अंदाजा लगा लेते हैं कि लेपर्ड आ गया। अब वह किसी मवेशी को ले ही जाएगा। यहां अंधेरे में बाहर निकलने का मतलब है, जान का खतरा। बानसूर के नारायणपुर क्षेत्र में तालवृक्ष और कुशालगढ़ के बीच बसे इस गांव जहां लोग पानी, बिजली, चिकित्सा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। लेकिन असली संकट यहां के भविष्य यानी बच्चों का है। स्कूल तो है लेकिन ग्रामीणों का आरोप है मास्टर जी सिर्फ झंडा फहराने आते हैं। बच्चों ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। ये बच्चे अब मवेशी चराते हैं। ग्रामीणों का आरोप था कि मास्टरजी पूरा दिन आसपास के गांवों में ताश खेलकर बिताते हैं। भास्कर टीम जब उस गांव पहुंची तो स्कूल टीचर को ताश खेलते हुए कैमरे में भी कैद किया। मामले को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा है- मुझे एक बार जानकारी भेज दीजिए। मैं तुरंत एक्शन लेता हूं। पहले जानकारी करा लेता हूं। ऐसा कैसे हो सकता है। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले देखिए ताश खेलते टीचर की तस्वीर 10 साल की सोनू पढ़ाई छोड़ बकरियां चराती है 10 साल की सोनू कहती है, पहले पढ़ने जाती थी। अब छोड़ दिया, मास्टरजी आते ही नहीं। अब बकरियां चरा लेती हूं और मां के कामों में हाथ बंटा लेती हूं। साथ में कुछ और बच्चे थे जो नीचे चले गए, वहीं बस गए और पढ़ते भी हैं। पिताजी कहते हैं- हमारे पास इतना पैसा नहीं कि नया घर खरीदें। जो भी है यहीं हैं। यही जीना है और यहीं मरना है। सोनू के साथ ही बकरियां चरा रहा 13 साल का श्योराम भी यही बात दोहराता है। उन्हें इसी पहाड़ पर अपनी जिंदगी जीनी है। वन-विभाग की चौकी में ही बना दिया स्कूल छोटी सी आबादी के इस गांव में शाम को चौपाल पर बैठे बुजुर्ग दिखाई दिए। उनसे स्कूल का पता पूछने पर 75 साल के रामलाल कहते हैं- यहां कौनसी स्कूल, मास्टरजी को तो कभी देखा ही नहीं। बस वह झंडा फहराने आते हैं और चले जाते हैं। अब तो बच्चों ने भी जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण राजेश बताते हैं- स्कूल नहीं वो तो वन-विभाग की चौकी है। जहां 26 जनवरी, 15 अगस्त को झंडा फहराया जाता है। वहां तो अब झाड़ियां उग गई हैं। फर्श उखड़ गया है। इसी वन चौकी के दो कमरों में पहले स्कूल लगता था। अब सब बंद है। चारपाई से नवजात गिर चुका पास ही में बनी झोपडी से 50 साल की लाली देवी ने गांव में नए लोगों को देखा तो पास आकर उत्सुकता से बातें सुनने लगी। सुनते-सुनते बोल पड़ी- यहां तो प्रसव कराने के लिए भी पहाड़ी से नीचे चारपाई पर लेकर जाना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि एक बार तो प्रसव करवा कर महिला को वापस ला रहे थे कि ठोकर लगी और नवजात चारपाई से नीचे आ गिरा। यहां सड़क ही नहीं है। भगवान का शुक्र है, नवजात बाल-बाल बच गया। ग्रामीणों का कहना है- हम यहां जानवरों के जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। कई लोग तो यहां से पलायन कर चुके हैं। जिनका खेती-बाड़ी का काम है वो कैसे जाएं। चिकित्सा के नाम पर कुछ नहीं है। न यहां सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है न ही सुख सुविधा। इस गांव तक आजादी के 75साल बाद तक कोई एक चीज पहुंची है तो वह है जीओ को मोबाइल नेटवर्क। एक ही जोहड़ से मवेशी-ग्रामीण पानी पी रहे ग्रामीण राजेश गुर्जर बताते हैं कि यहां सिर्फ एक जोहड़ है, जिससे मवेशी और ग्रामीण पानी पीते हैं। पानी बहुत गंदा है लेकिन, पीना पड़ता है। इसी में मवेशियों को नहलाना भी पड़ता है। गांव में एक दूसरा कुंड भी है। उसमें पानी कुछ साफ रहता है। इसलिए वहां से भी पानी लाते हैं। फिर उस पानी को छानकर पीते हैं। कई दशकों से पानी का यही इंतजाम है। सरकार ने एक बोर तक नहीं कराया है। कच्चा व आधा अधूरा रास्ता भी पिछली सरकार के समय बना है। इसलिए यहां के कुछ लोग बानसूर की पूर्व विधायक शकुंतला रावत को जानते हैं। पेंशन बंद, सरकारी योजनाओं का लाभ शून्य 75 साल के बुजुर्ग रामलाल का कहना है कि अब उनकी पेंशन बंद हो गई। काेई सुध नहीं ले रहा है। डेढ़ साल पहले तक पेंशन मिली है। लेकिन अब बंद हो चुकी है। दयाराम का कहना है कि राशन का गेहूं भी नहीं मिलता है। उनके गांव तक कोई आता नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं है। वोट के समय नेता जरूर आते हैं। बाकी कोई नहीं आता है। राह का माला गांव में पहुंचने का रास्ता पहाड़ों के ऊपर से जाता है। यहां कच्चा रास्ता बना हुआ है। कहीं बड़े-बड़े रोडे हैं। बीच-बीच में खड़ी चढ़ाई है। जिसमें इंसान का चढ़ना भी मुश्किल है। कई पहाड़ी के आसपास से गुजर रहे वाहन इसमें फंस जाते हैं। चलते-चलते देखिए गांव की तस्वीर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *