आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर में सोमवार को लड्डू वितरण केंद्र के पास आग लग गई। आग उस वक्त लगी जब लड्डू काउंटर पर बड़े पैमाने पर पवित्र प्रसाद लेने वालों की भीड़ थी। आग लगते ही भक्तों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है। तिरुपति तिरूमला देवस्थानम मंदिर प्रशासन के मुताबिक कंप्यूटर सेटअप से जुड़े UPS में शॉर्ट सर्किट के वजह से आग लगी है। हादसा 10 दिवसीय वैकुंठ द्वार दर्शनम उत्सव के दौरान हुई। आग की जानकारी मिलने के बाद मौके पर फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची और आग पर काबू पाया। हादसे से जुड़ी तस्वीर एक हफ्ते में दूसरा हादसा
तिरुमाला मंदिर में एक हफ्ते में यह दूसरा हादसा है। इससे पहले 8 जनवरी को मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शन टिकट केंद्र के पास भगदड़ मच गई थी। श्रद्धालु मंदिर में 10 दिनों के विशेष दर्शन के लिए टोकन के लिए लाइन में लगे थे। इस दौरान भगदड़ मच गई थी। घटना में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 40 लोग घायल हो गए थे। पूरी खबर पढ़ें… तिरुपति भारत का सबसे प्रसिद्ध और अमीर मंदिर
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और अमीर तीर्थस्थलों में से एक है। ये आंध्र प्रदेश के सेशाचलम पर्वत पर बसा है। भगवान वेंकटेश्वर के इस मंदिर का निर्माण राजा तोंडमन ने करवाया था। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 11वीं सदी में रामानुजाचार्य ने की थी। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर जब पद्मावती से अपना विवाह रचा रहे थे तो उन्होंने धन के देवता कुबेर से कर्ज लिया। भगवान पर अब भी वो कर्ज है और श्रद्धालु इसका ब्याज चुकाने में उनकी मदद करने के लिए दान देते हैं। तिरुमाला मंदिर को हर साल लगभग एक टन सोना दान में मिलता है। तिरुपति दर्शन करने जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को यहां का प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में दिया जाता है। यहां रोज करीब 3 लाख लड्डू बनाए जाते हैं। लड्डू को चने के बेसन, मक्खन, चीनी, काजू, किशमिश और इलायची से बनाया जाता है और इसकी रेसिपी करीब 300 साल पुरानी है। यहां बालों का दान किया जाता है
मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने मन से सभी पाप और बुराइयों को यहां छोड़ जाता है, उसके सभी दुःख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती हैं। इसलिए यहां अपनी सभी बुराइयों और पापों के रूप में लोग अपने बाल छोड़ जाते हैं। भगवान विष्णु को कहते हैं वेंकटेश्वर
इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यह मेरूपर्वत के सप्त शिखरों पर बना हुआ है, इसकी सात चोटियां शेषनाग के सात फनों का प्रतीक कही जाती हैं। इन चोटियों को शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरुड़ाद्रि, अंजनाद्रि, वृषटाद्रि, नारायणाद्रि और व्यंकटाद्रि कहा जाता है। इनमें से व्यंकटाद्रि नाम की चोटी पर भगवान विष्णु विराजित हैं और इसी वजह से उन्हें वेंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है। सिर्फ शुक्रवार को होते हैं पूरी मूर्ति के दर्शन
मंदिर में बालाजी के दिन में तीन बार दर्शन होते हैं। पहला दर्शन विश्वरूप कहलाता है, जो सुबह के समय होता है। दूसरा दर्शन दोपहर को और तीसरा दर्शन रात को होता है। भगवान बालाजी की पूरी मूर्ति के दर्शन केवल शुक्रवार को सुबह अभिषेक के समय ही किए जा सकते हैं। भगवान बालाजी ने यहीं दिए थे रामानुजाचार्य को साक्षात दर्शन
यहां पर बालाजी के मंदिर के अलावा और भी कई मंदिर हैं, जैसे- आकाश गंगा, पापनाशक तीर्थ, वैकुंठ तीर्थ, जालावितीर्थ, तिरुच्चानूर। ये सभी जगहें भगवान की लीलाओं से जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि श्रीरामानुजाचार्य जी लगभग डेढ़ सौ साल तक जीवित रहे और उन्होंने सारी उम्र भगवान विष्णु की सेवा की, जिसके फलस्वरूप यहीं पर भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे।


