एमडीएम अस्पताल में नवजातों के बदलने का मामला तीन दिन बाद भी सुलझ नहीं पाया है। बुधवार को जन्मे दो बच्चों को लेकर परिजन अब भी असमंजस में हैं कि असली बच्चा किसका है। अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि बच्चे बदले नहीं, बल्कि टैगिंग में गलती हुई थी। फिलहाल बच्चों और पिताओं के डीएनए सैंपल लिए गए हैं। रिपोर्ट आने में 3-4 दिन लगेंगे। गौरतलब है कि जनाना विंग में बुधवार को दो डिलीवरी हुई थी। जिसमें अस्पताल के रिकॉर्ड में पीपाड़ निवासी एक महिला के बेटी और दूसरी महिला के बेटे का जिक्र है। लेकिन स्टाफ की गलती से बच्चे का टैग गलत लिख दिया गया। इसी से गफलत शुरू हुई और दोनों परिवारों में बहस हो गई। अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने माना है कि टैगिंग और परिजनों को जानकारी देने में चूक हुई। उन्होंने बताया कि रजिस्टर और टिकट में सही विवरण दर्ज है—ममता को बेटी और विमला को बेटा हुआ था। उन्होंने आश्वासन दिया कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी जाएगी। इसी बीच महिला के पति ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले बेटे की सूचना दी गई थी। मिठाइयां बांटीं, खून भी दिया। लेकिन बाद में स्टाफ लड़की दे गया। अगर अस्पताल में बच्चा बदल सकता है तो डीएनए रिपोर्ट भी बदल सकती है। जांच एम्स से करवाई जाए। जबकि दूसरी महिला के पति ने कहा कि अगर रिपोर्ट में बेटी हुई तो उसे लक्ष्मी मानकर अपनाऊंगा। इधर इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें डॉ. रेखा जाखड़, डॉ. दीपक टाक और मैट्रन कंचन रावल सदस्य हैं। समिति की रिपोर्ट के साथ डीएनए नतीजे से ही तय होगा कि कौन-सा बच्चा किस मां का है।


