जन्म के करीब 6 घंटे बाद ही नवजात बच्ची को गत्ते के बॉक्स में बंद कर झाड़ियों में फेंक दिया। बच्ची खून से सनी हुई थी और बॉक्स में चींटियां भर चुकी थीं। रोने की आवाज सुनकर पहुंची राहगीर महिला ने बच्ची को बचा लिया। तुरंत एंबुलेंस बुलाकर बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाया गया। सांस लेने में दिक्कत के कारण वार्मर पर रखा गया, लेकिन फिलहाल वह खतरे से बाहर बताई जा रही है। मामला बांसवाड़ा के गढ़ी तहसील के बोरी गांव का है। घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे हथेलिया तालाब के पास की है। महिला को झाड़ियों से सुनाई दी रोने की आवाज प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया- मैं पैदल बोरी जा रही थी। भतीजी हथेलिया तालाब के पास भैंस चरा रही थी। तभी झाड़ियों से बच्चे के रोने की आवाज आई। आवाज लगातार आती रही। झाड़ियों में एक गत्ते का बॉक्स था। पास जाकर देखा तो अंदर नवजात बच्ची थी, कपड़ा खून से सना था और चींटियां बच्ची पर चल रही थीं। हमने तुरंत बच्ची को बाहर निकाला और साफ किया। इसी बीच जितेंद्र यादव और नारायण तीरगर पहुंचे और एंबुलेंस बुलवाई। गढ़ी थाने के ASI मांगीलाल ने बताया- एंबुलेंस से बच्ची को परतापुर अस्पताल ले जाया गया। वहां से देर रात बच्ची को महात्मा गांधी हॉस्पिटल बांसवाड़ा रेफर कर दिया गया। बच्ची के परिजनों की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के अस्पतालों से जानकारी जुटाई जा रही है। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर निनामा ने बताया- बच्ची प्री-मेच्योर है। सांस लेने में दिक्कत थी इसलिए वार्मर पर रखा। फिलहाल खतरे से बाहर है। प्रसव 6 से 7 घंटे पहले ही, इसलिए डिलीवरी आसपास के अस्पतालों में ही हुई डॉक्टर के मुताबिक नवजात का प्रसव 6 से 7 घंटे पहले ही हुआ। जिला सामाजिक न्याय एवं बाल अधिकारिता विभाग के मुताबिक पिछले एक साल जिले में 5 नवजात मिल चुके हैं। इनमें से दो नवजात पालना गृहों में और तीन झाड़ियों में बदहाल हालत में मिले। एमजी अस्पताल के पालना गृह में पिछले महीने 2 नवंबर को नवजात मिल चुका है। संबंधित ये खबर भी पढ़ें … मुंह में पत्थर ठूंसकर बच्चे को जंगल में फेंका, VIDEO:रोने की आवाज नहीं आए, इसलिए फेवीक्विक लगाया; जलाने के भी निशान मिले भीलवाड़ा में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। 15 दिन के मासूम को जंगल में फेंक दिया। (पूरी खबर पढ़ें)


