भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में फर्जी टेंडर और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के कई मामले सामने आते रहे हैं और अब ट्राइबल विभाग का एक और चौंकाने वाला कारनामा उजागर हुआ है। गदापाल प्राथमिक आश्रम शाला, जहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं, वहां विभाग ने शिक्षा की वास्तविक जरूरतों को दरकिनार करते हुए 11 लाख रुपये के कंप्यूटर सप्लाई करा दिए, जबकि आश्रम में बच्चों के बैठने के लिए बेंच-टेबल तक नहीं हैं। पिछले वर्ष सप्लाई किए गए 10 कंप्यूटर और एक प्रोजेक्टर एक भी दिन इस्तेमाल नहीं हुए। कंप्यूटर कक्ष को कपड़े से ढंक दिया गया है और मशीनों में धूल भर चुकी है। शिक्षक शशि कुमार कुर्रे ने बताया कि 79 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक नियुक्त है और कंप्यूटर क्लास लेने के लिए अलग से कोई प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है। ऐसे में कंप्यूटर कभी उपयोग में नहीं आए और अब मरम्मत के नाम पर फिर से बजट खर्च करने की तैयारी बताई जा रही है। बिना टेंडर के खरीदी पर सवाल : गदापाल आश्रम की मरम्मत के लिए स्वीकृत 21 लाख में से 11 लाख रुपए कंप्यूटरों पर खर्च कर दिए गए। बताया जा रहा है कि खरीदी टेंडर की बजाय कोटेशन में कर ली गई और ब्रांडेड की जगह घटिया गुणवत्ता के कंप्यूटर सप्लाई हुए, जो जल्दी खराब भी हो गए। बच्चों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी : आश्रम के 79 बच्चे ज़मीन पर बैठकर पढ़ते हैं, बेंच-कुर्सी नहीं है। विभाग ने वास्तविक आवश्यकताओं की जगह स्मार्ट क्लास के नाम पर सप्लाई का खेल खेला, जबकि शिक्षक नियुक्ति तक नहीं हुई। बताया जा चुका है कि तीन महीने पहले फर्जी खरीदी और निर्माण कार्यों के मामले में दंतेवाड़ा के दो सहायक आयुक्त और एक बाबू जेल भी जा चुके हैं, हालांकि वे अभी जमानत पर हैं। फिर भी विभाग में अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सहायक आयुक्त राजीव नाग का कहना है कि कंप्यूटर की खरीदी उनके कार्यकाल में नहीं हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि कंप्यूटर धूल खा रहे हैं और कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी।


