योजना का हाल जानने कलेक्टर बाइक से 110 किमी का सफर कर अबूझमाड़ पहुंचीं

भास्कर न्यूज | नारायणपुर नक्सल प्रभावित और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने कलेक्टर नम्रता जैन सक्रिय फील्ड विजिट के लिए लगातार दूरस्थ ग्रामों का दौरा कर रही हैं। बुधवार को उन्होंने बाइक से 110 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर जंगलों, नदी–नालों और कच्चे रास्तों को पार करते हुए ढोंढरबेड़ा, कुड़मेल और जाटलूर पहुंचकर जमीनी हालात का निरीक्षण किया। यह दौरा नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने और वास्तविक समस्याओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कलेक्टर जैन ने ढोंढरबेड़ा आश्रम में भोजन व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और आवासीय कक्षों की स्थिति को परखा। बच्चों से संवाद कर शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन किया और संतोषजनक उत्तर मिलने पर उनकी सराहना की। शौचालय निर्माण, खेल सामग्री और अधीक्षक निवास कक्ष की मांग पर प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने निर्देश दिए गए। इसके बाद कलेक्टर कुड़मेल पहुंचीं। यहां बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके साथ राष्ट्रगान गाया, जिसने बच्चों में उत्साह और सुरक्षा का विश्वास मजबूत किया। उन्होंने शिक्षकों को प्रतिदिन मच्छरदानी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बच्चों द्वारा जूते और खेल सामग्री की मांग पर कलेक्टर ने शीघ्र उपलब्धता का भरोसा दिलाया। स्थानीय 12वीं पास युवक मोतीलाल वड्डे को अतिथि शिक्षक के रूप में बच्चों की पढ़ाई में योगदान देने प्रेरित किया। कलेक्टर जैन ने नदी-नालों को पार करते हुए जाटलूर पहुंचकर बालक आश्रम का निरीक्षण किया और बच्चों को यूनिफॉर्म वितरित की। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लेकर अपने क्षेत्र के विकास में भागीदार बनने की प्रेरणा दी। यहां भी भोजन, स्वच्छता, पेयजल व आवासीय कक्षों की स्थिति की जानकारी ली गई। ग्राम जाटलूर के बाजार और आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिन पर कलेक्टर ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन देते हुए नियद नेल्लानार योजना के तहत पात्र परिवारों को 100% लाभ देने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरे में एडीशनल एसपी अजय कुमार, पीडब्ल्यूडी के ईई संजय चौहान, पीएमजीएसवाई के ईई विनय सहित कई अधिकारी शामिल रहे। यह दौरा प्रशासनिक सक्रियता का उदाहरण पेश करता है, जहां कलेक्टर ने दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं को धरातल तक ले जाने का प्रयास किया है।

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