भास्कर न्यूज | जालंधर बूटा मंडी स्थित श्री गुरु रविदास धाम में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 649वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के तीसरे दिन भी श्रद्धा का सैलाब उमड़ता रहा। देर रात तक रौनक रही। दो दिनों के मुख्य समागमों के बाद तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और सुबह से ही भारी संख्या में संगत नतमस्तक होने के लिए पहुंचने लगी। धाम परिसर में आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मेले की रौनक भी चरम पर रही, जहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने गुरु महाराज के चरणों में माथा टेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान गुरुबाणी के कीर्तन और धार्मिक दीवानों ने वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। बूटा मंडी से लेकर वडाला चौक और फिर बाबू जगजीवन राम चौक में खूब रौनक रही है। सड़क के दोनों ओर सजी दुकानों पर भारी चहल-पहल देखी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मेले में जमकर खरीदारी की। मेले में ज्वेलरी, पर्स, बच्चों के लिए खिलौने, गुब्बारे, खाने-पीने के स्टाल सबको अपनी ओर खींच रहे थे। अब मेले धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, लेकिन जालंधर में श्री गुरु रविदास महाराज के आशीर्वाद से हर साल रौनक बढ़ रही है। श्री गुरु रविदास एजुकेशन एंड चेरिटेबल ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी विनोद कौल कहते हैं कि सामाजिक और आर्थिक तरक्की के लिए सर्वसमाज का मिलन जरूरी है। प्राचीन काल से ही मेले आपसी विचारों के अदान-प्रदान, रिश्तों को आगे बढ़ाने व एक दूसरे से नई चीजें सीखने का मंच रहे हैं। बूटा मंडी में श्री गुरु रविदास महाराज के प्रकाशोत्सव के समारोह हमारे लिए प्रेरणा हैं। दूसरी तरफ मेले में पूरा दिन लोगों ने शगुन की खरीददारी की है। यहां घर का सामान ले रहे कमल बिल्ला कहते हैं कि बचपन से पहले हमने अपने दादा बात सीखी थी कि मेले में दूर-दूर से गरीब कारीगर आते हैं, मेलों में सामान जाकर परिवार के लिए रोटी कमाते हैं, इनसे कुछ न कुछ अवश्य खरीदो। ये पुण्य है। फिर मेरे पिता ने परंपरा आगे बढ़ाई। अब हम अपनी बहू-बेटों को ये सीख दे रहे हैं कि मेले में घर के लिए अवश्य कुछ खरीदें। वहीं, मेले में वो कुछ है, जो सारा साल खरीदने के लिए नहीं मिलेगा। यहां पारंपरिक बच्चों के लिए लकड़ी के खिलौने हैं, कई प्रकार के सजावटी सामान हैं। दुकान बताते हैं कि लोग श्रीगंगा नगर, अबोहर, कादियां, हरियाणा जैसे इलाकों से आए हैं। सबके पास मेलों की लिस्ट है। अब श्री गुरु रविदास महाराज जी के प्रकाशोत्सव समारोहों के बाद बड़ा मेला सोढल का आएगा। ये मेले दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को पंजाब की सांस्कृति से अवगत करवाते हैं।


