झाबुआ जिले के थांदला वन विभाग ने खैर की लकड़ी के अवैध परिवहन के एक बड़े प्रयास को विफल कर दिया है। वन परिक्षेत्र अधिकारी तोलाराम हटीला के नेतृत्व में टीम ने पेटलावद-अगराल मार्ग पर एक वाहन से गीली खैर लकड़ी जब्त की और तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। थांदला वन परिक्षेत्र अधिकारी को मंगलवार सुबह खैर की लकड़ी के अवैध परिवहन की गोपनीय सूचना मिली थी। इसके बाद हटीला ने तुरंत एक गश्ती और चेकिंग दल का गठन किया, जिसे पेटलावद-अगराल मार्ग पर ग्राम झोसर के पास तैनात किया गया। सुबह लगभग 6 बजे, चेकिंग के दौरान दल ने एक सफेद वाहन (क्रमांक MP05 G 7108) को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें खैर प्रजाति की 55 नग गीली लकड़ी भरी हुई मिली। वाहन चालक की पहचान आशीष पिता प्रभु भाभोर, निवासी अंतर्वेलिया, तहसील झाबुआ के रूप में हुई। वह मौके पर लकड़ी के परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गीली खैर लकड़ी ग्राम झोसर माता पाड़ा निवासी कचरू पिता बुहारीया कटारा की निजी भूमि और आसपास की शासकीय व अन्य निजी भूमियों से बिना अनुमति के काटी गई थी। यह कृत्य वन अधिनियमों, म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) और मध्यप्रदेश आदिम जनजाति संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। इस मामले में वाहन चालक आशीष के साथ दो अन्य आरोपी राकेश और पान सिंह को भी हिरासत में लिया गया है। उन्हें पूछताछ के लिए वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया है। जब्त किया गया वाहन शंभूलाल, निवासी ग्राम कुआंझागर, का बताया जा रहा है। वनमंडलाधिकारी झाबुआ अमित वसंत निकम और उपवनमंडलाधिकारी झाबुआ एस.एल. यादव के मार्गदर्शन में, वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धाराओं 41, 52, 67 और मध्यप्रदेश अभिवहन (वनोपज) नियम 2022 के तहत प्रकरण क्रमांक 2013/18 दर्ज किया है। जब्त वाहन को राजसात करने की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। इस कार्रवाई में प.स. अमरगढ़ तारसिंह भाभर, वन रक्षक कसु डामोर, प्रेमसिंह चारेल और राकेश भाभर का विशेष योगदान रहा।


