थार के किसानों की तकदीर बदल रही अनार की खेती:बदलते मौसम ने चिंता में डाला, काजरी के अनार अनुसंधान से किसानों में जगी आस

राजस्थान का पश्चमी इलाका, कभी यहां के लोग पानी की एक- एक बूंद की लिए तरसते थे लेकिन अब किसान उसी जमीन पर नई इबारत लिख रहे है। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यहां के किसानों ने देश-विदेश में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ऐसी ही एक अमिट छाप थार के किसानों अनार की खेती में भी छोड़ी। अनार की खेती धोरों के अंधेरों में एक नया उजियारा फैलाया। यहां पैदा होने वाले अनार की मांग देश कई हिस्सों के साथ-साथ विदेश में भी है। लेकिन अब किसान निरंतर बदलते जलवायु परिदृश्य के कारण वर्षा के स्वरूप में आए बदलाव से किसान दिन-प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की फसल रोगों और उत्पादन क्षति का सामना कर रहे हैं। असमय वर्षा, लंबे सूखे के दौर तथा अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति के बीच केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर में अनार पर चल रहे अनुसंधान कार्य ने किसानों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। पश्चिमी राजस्थान की विशेष मृदा, जल संसाधन एवं पारिस्थितिकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पोषक तत्व प्रबंधन पर किए जा रहे शोध के तहत वैज्ञानिक डॉ. ओ. पी. मीणा के अनार ऑर्चर्ड में इस वर्ष उच्च गुणवत्ता वाले अनार का अच्छा उत्पादन देखने को मिला है। वैज्ञानिक तरीके से जल प्रबंधन अपनाएं इसी संदर्भ में काजरी विभाग-द्वितीय के विभागाध्यक्ष डॉ. धीरज सिंह ने बताया कि यदि किसान पोषक तत्व प्रबंधन के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से जल प्रबंधन अपनाएं और वर्षा के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए रोग नियंत्रण के लिए उचित समय पर दवाओं का छिड़काव करें, तो बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने कहा -इसमें कोई दो राय नहीं कि वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान अनार की उत्कृष्ट फसल ले सकते हैं। जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों के अनुसार किसानों को प्रशिक्षण काजरी के कार्यवाहक निदेशक डॉ. एस. पी. एस. तँवर ने अनार उत्पादकों के लिए भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करता रहा है और भविष्य में भी जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों के अनुसार किसानों को और अधिक उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे बदलते मौसम में भी सफल खेती कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि काज़री में हो रहा यह अनुसंधान पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो सकता है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी। थार के अनार की विदेशों में डिमांड
प्रदेश भर में अनार की खेती का रकबा अब 17 हेक्टेयर ज्यादा है। इनमें से 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा एरिया तो बाड़मेर, जालोर और जोधपुर जिले में ही है। प्रदेश के अन्य जिले के किसान बाकी दो हजार के करीब हेक्टेयर में अनार की खेती कर रहे हैं। प्रदेश में अनार उत्पादन करीब 156844 टन हो रहा है। थार के अनार की नेपाल, बांग्लादेश, ईरान, यूएसए, चीन,फ्रांस में सर्वाधिक सप्लाई की जाती है। सालाना 10 अरब रुपए से ज्यादा का व्यापार
देश मे सबसे ज्यादा अनार उत्पादन महाराष्ट्र में होता है। इसके बाद राजस्थान और गुजरात में अनार का उत्पादन ज्यादा होता है। राजस्थान में भी बाड़मेर-बालोतरा जिले इसके उत्पादन में आगे हैं। अनार का सालाना करीब 10 अरब रुपए का व्यापार होता है। तीन साल में देना शुरू कर देता है फल
अनार का पौधा तीसरे साल से ही फ्रूटिंग देना शुरू कर देता है। यह 20 साल तक फल देता है और एक पौधे से सालाना करीब 30 किलो तक अनार की पैदावार होती है। अनार की खेती पर कृषि विभाग किसानों की सब्सिडी भी देता है। एक हैक्टेयर में करीब 800 अनार के पौधे लगाए जा हैं। बाजार में इसकी क्वालिटी और कलर के अनुसार रेट 30 से 150 रुपए प्रति किलो तक मिल जाता है।

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