थार चोरी…जीपीएस से पुराने मालिक के पास मिली लोकेशन, तीन पर पर्चा दर्ज

लुधियाना| घर के बाहर खड़ी महिंद्रा थार कार रातों-रात चोरी हो गई, लेकिन जांच में सामने आया कि यह सामान्य वाहन चोरी नहीं, बल्कि पहले से रची गई साजिश का नतीजा हो सकता है। पीड़ित को जिस थार को “अच्छी डील” बताकर बेचा गया था, वही गाड़ी करीब दो साल बाद अचानक चाबी से खोलकर उठा ली गई। पीड़ित बलविंदर सिंह ने पुलिस को बताया कि उन्होंने साल 2023 में एक जानकार के जरिए महिंद्रा थार (RJ-21-CC-1284) खरीदी थी। उन्हें बताया गया कि गाड़ी राजस्थान नंबर की है, लेकिन एनओसी क्लियर कराकर पंजाब का नंबर लगवा दिया जाएगा। पूरी रकम लेने के बावजूद न तो एनओसी दिलाई गई और न ही तीसरी चाबी सौंपी गई। करीब एक साल पहले आरोपी ने खुद संपर्क कर कहा कि असली मालिक गाड़ी वापस चाहता है और पूरी रकम लौटाने को तैयार है। पीड़ित इस पर राजी भी हो गया, लेकिन पैसा लौटाने की जगह 30 नवंबर और 1 दिसंबर की दरमियानी रात करीब 12:45 बजे घर के बाहर खड़ी थार को अज्ञात लोग चाबी से खोलकर ले गए। पीड़ित का कहना है कि गाड़ी में जीपीएस लगा था, जिससे लोकेशन ट्रैक करने पर पता चला कि वाहन सीधे राजस्थान के नागौर जिले तक पहुंच गया। इसके बाद जीपीएस डिवाइस हटा दी गई। गाड़ी के डैशबोर्ड में असली RC, आधार कार्ड, सोने का कड़ा और अंगूठी भी रखी हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह चोरी गाड़ी बेचने वाले व्यक्ति, राजस्थान के असली मालिक और एक यार्ड मालिक की मिलीभगत से कराई गई। पीड़ित ने जीपीएस लोकेशन के स्क्रीनशॉट और अन्य सबूत पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 303(2), 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। नामजद आरोपियों के साथ-साथ दो अज्ञात लोगों को भी जांच में शामिल किया गया है। आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग जगहों पर दबिश दी जा रही है और राजस्थान से भी संपर्क किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क को सामने लाकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सस्ती डील का जाल : न एनओसी दी और न सौंपी थी तीसरी चाबी गाड़ी खरीदते-बेचते समय ध्यान रखें {एनओसी और ट्रांसफर पहले, पैसा बाद में। {दूसरे राज्य की गाड़ी खरीदते समय पहले आरटीओ से एनओसी और आरसी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कराएं। {तीनों चाबियां लेना अनिवार्य। कार की तीसरी (स्पेयर) चाबी न मिले तो सौदा अधूरा मानें। असली मालिक से सीधा सत्यापन करें। सिर्फ बिचौलिए या जानकार पर भरोसा न करें। {GPS और डॉक्युमेंट्स कार में न छोड़ें गाड़ी में आधार कार्ड, आरसी, ज्वेलरी या अन्य कीमती सामान कभी न रखें। {पेमेंट का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखें { जिस यार्ड या व्यक्ति से गाड़ी ली जा रही है, उसकी लाइसेंस, पिछला रिकॉर्ड और स्थानीय सत्यापन जरूर करें।

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