दंतेवाड़ा की ज्यादातर दुकानों में चावल नहीं, पहुंचा भी तो खराब

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा गीदम वेयरहाउस में 33 हजार क्विंटल चावल खराब होने के मामले के बाद नान और खाद्य विभाग अब तक स्थिति संभाल नहीं पाए हैं। उल्टा जिले में पीडीएस व्यवस्था और बिगड़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने 6 फरवरी से गांव-गांव में चावल उत्सव मनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन दंतेवाड़ा में हालात ऐसे हैं कि पीडीएस दुकानों से चावल वापस गोदामों में लौट रहा है। इसकी मुख्य वजह ये कि चावल की खराब गुणवत्ता बताई जा रही है। बालूद पीडीएस दुकान में भेजे गए 228 बैग चावल हितग्राहियों के विरोध के बाद खाद्य विभाग को वापस लेने पड़े। लगातार सामने आ रही शिकायतों से जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह चरमराई नजर आ रही है। इसके लिए नान और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फरवरी में जिले की 173 उचित मूल्य दुकानों में से बमुश्किल 20 दुकानों तक ही राशन पहुंच पाया, जबकि कई गोदामों में पर्याप्त स्टॉक नहीं है। कुआकोंडा क्षेत्र की 49 दुकानों के लिए करीब साढ़े 6 हजार क्विंटल चावल की आवश्यकता है, लेकिन यहां गोदाम में महज 900 क्विंटल स्टॉक उपलब्ध है। दंतेवाड़ा में कुल 4100 क्विंटल चावल स्टॉक में होना बताया जा रहा है, जो जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। गीदम क्षेत्र की 55 दुकानों में से खाद्य विभाग अब तक केवल 5 दुकानों तक ही चावल पहुंचा पाया है और गोदाम लगभग खाली हैं। इसी तरह दंतेवाड़ा ब्लॉक की 69 दुकानों में भी अब तक चावल नहीं पहुंच सका है। सरकार हर महीने की 1 से 15 तारीख के बीच घर-घर राशन पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन दंतेवाड़ा में पिछले दो महीनों से हालात बिगड़े हुए हैं। राज्य स्तर पर 6 फरवरी से शुरू हुए चावल उत्सव के विपरीत दंतेवाड़ा में खाद्य विभाग ने अलग तारीख तय की है। जिला खाद्य अधिकारी कीर्ति कौशिक के अनुसार चावल देर से पहुंच रहा है इसलिए चावल उत्सव 20 फरवरी से मनाया जाएगा। अफसरों ने भी माना कि अभी सभी पीडीएस दुकानों तक चावल नहीं पहुंच पाया है। इधर, लगातार अव्यवस्था से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है और सरकार की छवि पर भी असर पड़ता दिख रहा है। कार्रवाई के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी जवाबदार अफसरों पर लगातार लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। गीदम वेयरहाउस मामले में 3 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। जिला खाद्य अधिकारी कीर्ति कौशिक को संचालनालय भेजते हुए मिलरों को चावल लौटाने की बड़ी कार्रवाई भी की जा चुकी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आ रहा। जिले के किसी भी गोदाम में इतना चावल उपलब्ध नहीं कि 2 लाख हितग्राहियों को फरवरी का राशन दिया जा सके। फिलहाल नान मिलरों के भरोसे बैठा है। मिलर चावल जमा करेंगे, तभी वितरण संभव हो पाएगा। सूत्रों के अनुसार जो चावल मिलरों द्वारा जमा किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं बताई जा रही। इससे समस्या और बढ़ गई है।

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